Chhattisgarh State Assembly Election: देश में एक ओर आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सभी पार्टियां जी तोड़ मेहनत कर रही है तो वहीं दूसरी ओर इसी साल के अंत तक पांच राज्यों में विधानसभा का चुनाव होना है। जिसे भाजपा, कांग्रेस समेत सभी पार्टियां लोकसभा चुनाव के सेमीफाइनल के तौर पर देख रही है और इसके लिए सभी राजनैतिक पार्टीयां कमर तोड़ कोशिश में जुटी हुई है।
बता दें कि लोकसभा चुनावों के लिए एक ओर एनडीए और इंडी गठबंधन अपनी अपनी तैयारियों में जुटी हुई है लेकिन दूसरी ओर सारे गठबंधनों से दूर रही बसपा फिलहाल छत्तीसगढ मे सेंध लगाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए बसपा सुप्रीमो मायावती ने छत्तीसगढ में अपने पैर पसारने के लिए आदिवासियों को साधने की कोशिश कर रही है। इसी क्रम में उन्होंने आदिवासी समाज की राजनीति करने वाली पार्टी से गठबंधन भी कर लिया है।
इतने सीटों पर चुनाव लड़ेगी बीएसपी
दरअसल छत्तीसगढ़ में बीते सोमवार को बहुजन समाज पार्टी और गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का गठबंधन हो गया। आपको बताते चले कि पार्टियों का गठबंधन राज्य की कुल 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। इससे मायावती की घोषणा कायम रहेगी कि वो न तो एनडीए गठबंधन के साथ और न ही इंडी गठबंधन के साथ हाथ मिलाएंगी।
बता दे कि राज्य में नए गठबंधन को लेकर प्रदेश बीएसपी अध्यक्ष हेमंत पोयाम का कहना है कि समझौते के तहत 53 सीटों पर बीएसपी और 37 सीटों पर GGP अपने प्रत्याशी को उतारने वाली है, जिसकी घोषणा बीएसपी के राज्यसभा सदस्य रामजी गौतम और GGP के राष्ट्रीय महासचिव श्याम सिंह मरकाम समेत दोनों दलों के अन्य नेताओं ने बीते सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में की थी। दोनों दलों ने इस दौरान गठबंधन की जीत का भरोसा भी जताया और कहा कि इस बार बीजेपी और कांग्रेस दोनो को ही राज्य से बाहर कर देंगे। बता दें कि बीएसपी राज्य में 9 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर चुकी है।
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अनुसूचित जाति बहुल इलाके में बीएसपी की मजबूत पकड़
ये भी बताते चले कि पिछले विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने राज्य में छत्तीसगढ़-जे और भाकपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। उस वक्त पार्टी को सिर्फ दो सीटों पर जीत मिली थी और अगर वोट प्रतिशत की बात करें तो उन्हें कुल 3.87 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे जबकि उसकी सहयोगी छत्तीसगढ़-जे को 5 सीटों पर कामयाबी मिली थी। तो दूसरी ओर अगर GGP की बात करें तो उसे पिछले चुनाव में केवल 1.73 फीसदी वोट मिले थे।
बता दें कि छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाके में निवास करने वाली अनुसूचित जाति बहुल इलाके में बीएसपी का अच्छा खासा प्रभाव है। वहीं, जीजीपी को बिलासपुर और सरगुजा क्षेत्र के कुछ आदिवासी बहुल हिस्सों में समर्थन मिला था। इस बीच राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बीएसपी और जीजीपी का गठबंधन सत्ताधारी दल कांग्रेस के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
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आदिवासी को ही बनाया जाएगा मुख्यमंत्री
गौरतलब है कि गठबंधन के नेताओं ने दावा किया है कि गठबंधन में बड़ी संख्याओ में महिलाओं को टिकट दिया जाएगा और तो ओर पार्टी के दरवाजे सभी आदिवासी समुदायों के लिए खुले है साथ ही अगर गठबंधन चुनाव जीतता है तो किसी आदिवासी को ही राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। जबकि बसपा के छत्तीसगढ़ प्रभारी रामजी गौतम ने कहा है कि उनका गठबंधन न्याय दिलाएगा साथ ही समाज के सभी वर्गों के पिछड़ों, दलितों, आदिवासीयों, गरीबो के अधिकार के लिए लड़ेगा।

