MS Swaminathan Passed Away: भारत के महान कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन (MS Swaminathan) का आज 98 वर्ष के उम्र में निधन हो गया। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में सुबह 11.20 बजे उन्होंने अपने जीवन की आखिरी सांस ली। मिली जानकारी के मुताबिक स्वामीनाथन (MS Swaminathan) का निधन लंबी उम्र की वजह से आने वाली दिक्कतों के चलते हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स हैंडल पर एम एस स्वामीनाथन (MS Swaminathan) के साथ दो तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि डॉ. एमएस स्वामीनाथन (MS Swaminathan) के निधन से गहरा दुख हुआ। हमारे देश के इतिहास के एक बहुत ही महत्वपूर्ण समय में, कृषि में उनके अभूतपूर्व कार्य ने लाखों लोगों के जीवन को बदल दिया और हमारे देश के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की।
स्वामीनाथन का जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा
प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में अपने क्रांतिकारी योगदान के अलावा डॉ. स्वामीनाथन (MS Swaminathan) नवप्रवर्तन के पावरहाउस और कई लोगों के लिए एक प्रेरक गुरु थे। अनुसंधान और परामर्श के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने अनगिनत वैज्ञानिकों और नव प्रवर्तकों पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने कहा कि डॉ. स्वामीनाथन (MS Swaminathan) के साथ अपनी बातचीत को हमेशा याद रखूंगा। भारत को प्रगति करते देखने का उनका जुनून अनुकरणीय था। उनका जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदनाएं। ओम शांति।
भारत में हरित क्रांति के जनक है स्वामीनाथन
बता दें कि भारत के महान कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन (MS Swaminathan) का जन्म 7 अगस्त, 1925 को हुआ था। उन्हें भारत में हरित क्रांति के जनक के तौर पर जाना जाता है। स्वामीनाथन (MS Swaminathan) डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर के वैज्ञानिक थे। उन्होंने 1972 से लेकर 1979 तक ‘इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च’ के अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया।
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कृषि क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से नवाजा था। महान वैज्ञानिक स्वामीनाथन (MS Swaminathan) की गिनती भारत के महान कृषि वैज्ञानिकों के रूप में होती हैं, जिन्होंने धान की ऐसे प्रकार को तैयार किया, जिसने भारत के निम्न आय वाले किसानों को अधिक धान पैदा करने के काबिल बनाया।
दो कृषि मंत्रियों के साथ मिलकर किया काम
गौरतलब है कि कृषि वैज्ञानिक डॉ. स्वामीनाथन (MS Swaminathan) ने ‘हरित क्रांति’ की सफलता के लिए दो केंद्रीय कृषि मंत्रियों सी. सुब्रमण्यम (1964-67) और जगजीवन राम (1967-70 और 1974-77) के साथ मिलकर काम किया। बता दें कि यह एक ऐसा प्रोग्राम था, जिसमें केमिकल-बायोलॉजिकल टेक्नोलॉजी के जरिए गेहूं और चावल की प्रोडक्टिविटी बढ़ गई। हरित क्रांति की वजह से भारत अनाज के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के रास्ते पर आगे बढ़ पाया। हरित क्रांति की वजह से भारत की तस्वीर बदल गई।

