कहते हैं हमारे देश का कानून इतना मजबूत है कि अगर वो अपने पर आ जाए तो चुटकियों में किसी को भी न्याय दिला सकता है. अब मामला है मस्जिद का वैसे तो हमारा देश कौमी एकता की नींव पर टिका हुआ और कोई कुछ भी कहे लेकिन भारत में सभी धर्मों के लोग बड़े ही प्रेम से रहते हैं… लेकिन जब मंदिर या मस्जिद की बात आती है तो लोगों के धैर्य का बांध टूट जाता है और कहीं न कहीं विवाद की एक लकीर खिच जाती है जिसपर नेता सियासत की रोटियां सेंकते हैं
जानकारी के लिए बता दें वैसे तो हमारे देश का कानून की मिशाल दुनिया में दी जाती है, लेकिन एक नकारात्मक पहलू ये बी है कि जिस न्यायायालय में आप नयाय की आस लगाकर वहां का दरवाजा खटखटते थे कहीं न कहीं वो भी यानी कोर्ट खुद न्याय का मारा है… दरअसल मामला है कोर्ट के अंदर गैरकानूनी तरह से जमीन हड़पने से और उसी जगह पर जबरन मस्जिद बनाने पर
सवाल ये भी था कि अगर सुप्रीम कोर्ट आदेश दे भी तो कोर्ट के भीतर अवैध मस्जिद को तोड़ेगा कौन? इलहाबाद हाईकोर्ट के जजों को अब योगी सरकार से आख़िरी उम्मीद है, कोई सरकार कितनी ताकतभर है इसका अंदाजा उसकी न्याय व्यवस्था से लगाया जाता है. योगी सरकार के पीले पंजे वाले बुलडोजरों के बारे में तो आप सब अच्छे से वाकिफ हैं…. लेकिन ये मामला धर्म से जुड़ा इसीलिए इस मामले को इतनी तूल दिया जा रहा है… आखिर क्या है मस्जिद विवाद
…योगी सरकार की पहल के बाद सुप्रीम कोर्ट में तीखी नोक-झोंक हुई, एक तरफ से सपा नेता कपिल सिब्बल ने तो ये तक कह दिया, योगी भगवा वाले नेता है इसलिए हमारा हक़ छीन रहे हैं? पर कोर्ट में जो हुआ वो सुनकर आप कहेंगे सुप्रीम कोर्ट का फैसला एकदम सही था…मस्जिद के पक्ष में दलील देने वाले कपिल सिब्बल ने कहा
मस्जिद हाईकोर्ट के अंदर है ही नहीं, जहां हम सालों से नमाज पढ़ रहे हैं, वहां का हक हमसे नहीं छीनना चाहिए, प्रदेश में सरकार बदल गई इसलिए ऐसा किया जा रहा हैजिसके जवाब में हाईकोर्ट की ओर से पेश हुए वकील राकेश द्विवेदी ने कहा
इस हिसाब से तो सड़कों पर भी मस्जिद बन जाएंगी, क्योंकि वहां भी कभी न कभी नमाज पढ़ी जाती है. वकीलों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस एमआर शाह औऱ जस्टिस सीटी रविकुमार ने अपना फैसला सुनाया कि तीन महीने के भीतर आपको ये जगह खाली करनी होगी, यहां से मस्जिद हटेगी और अगर खुद से आप मस्जिद नहीं हटाते तो फिर इसे हटाने की कार्रवाई की जाएगी….
सालों पहले जानबूझकर मस्जिद को वहां बनाया गया, ये जानते हुए भी यहां हाईकोर्ट बन चुका है, जज बैठते हैं फैसला सुनाते है, ये विषय आस्था का है पर आस्था अंधविश्वास में नहीं बदलनी चाहिए….., योगी की सरकार पर ये जिम्मेदारी है कि हाईकोर्ट की ज़मीन को खाली करवाया जाए, यानि आज वक्त ऐसा आ गया है जब जज सरकार के भरोसे बैठे हैं, बुलडोजर हाईकोर्ट के भीतर भी चलेगा…इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में एक नया बवाल खड़ा हो गया, हालांकि पहले सरकारी जमीन पर कब्जा कर मंदिर-मस्जिद बनाने का खेल खूब चलता था, लेकिन जब से योगी सत्ता में आए इस पर ज्यादा नजर रखी जाने लगी.

