पहलवानों और बृजभूषण के बीच चल रही लड़ाई अभी थमने का नाम नहीं ले रही है। पहलवान बृजभूषण की गिरफ्तारी को लेकर अड़े हुए हैं कि जब तक बृजभूषण को सलाखों के पीछे नहीं देख लेते वो अपनी सत्याग्रह न्याय की लड़ाई को जारी रखेंगे।
पहलवानों के साथ हुए यौन उत्पीड़न को लेकर आग इतनी फैलती जा रही है कि अब जाति फैक्टर भी इसमें आ गया है। जाट बिरदारी भी अब पहलवानों के साथ आ गई है और उन्हें न्याय जल्दी मिले इसलिए वो भी पहलवानों की सत्याग्रह की लड़ाई में साथ हैं।
पहलवानों का कहना है कि बृजभूषण सत्ता पक्ष भाजपा पार्टी के गोंडा के कैसरगंज से सांसद है तो पार्टी उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस मदन बी लोकुर ने दिल्ली पुलिस की आलोचना की है क्योंकि जब पहलवान नए संसद की तरफ शांति मार्च निकाल के जा रहे थे तो पुलिस ने उनके साथ जो किया वो बेहद ही निंदनीय था। देश के लिए खेलने वाले और मेडल जीतकर दुनिया में भारत को गौरवान्वित कराने वालें पहलवानों के साथ क्रूरता की गई वो बेहद ही गलत था।
पूर्व जस्टिस मदन बी लोकुर ने कहा देश के पहलवानों को न्याय ना मिलना प्रताड़ना के सामान ही है। इसके साथ ही पूर्व जस्टिस ने ये भी कहा कि डब्ल्यूएफआई के पास यौन उत्पीड़न की शिकायतों से निपटने के लिए समिति नहीं है। पहलवान सीधा ही जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने के लिए नहीं उतरे उन्होनें जनवरी में कईं शिकायतें की लेकिन संघ के पास कोई शिकायत कमेटी ही नहीं थी तभी पहलवान सड़को पर न्याय के लिए उतर आए।
वहीं सुप्रीम कोर्ट की वकील वृंदा ग्रोवर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा आरोप लगाया कि सरकार ने पहलवानों के मामले में कानून का उल्लंघन किया है। ‘‘आंतरिक शिकायत समिति का होना कानून के तहत अनिवार्य है। कुश्ती महासंघ में आईसीसी नहीं होने से कानून का उल्लंघन किया जा रहा है।’’ ग्रोवर ने कहा कि इस मामले के जरिए ये संकेत दिया जा रहा है कि महिलाओं को शक्तिशाली व्यक्तियों के खिलाफ यौन अपराध की रिपोर्ट दर्ज नहीं करानी चाहिए।
वहीं बृजभूषण भी लगातार अपने को डिफेंड करते हुए शक्ति प्रदर्शन कर रहें हैं। अब पहलवानों और बृजभूषण की इस लड़ाई में देखने वाली बात ये रहेगी कि पहलवानों का सत्याग्रह उन्हें न्याय दिलाएगा या बृजभूषण का शक्ति प्रदर्शन कुछ काम कर पाएगा।

