नोएडा में साइबर क्राइम की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। साइबर पुलिस द्वारा नियमित जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला नोएडा के सेक्टर-62 निवासी रंजना (36) का है। साइबर अपराधियों ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर पार्सल में ड्रग्स होने का झूठा आरोप लगाया और दो दिन तक डिजिटल हिरासत में रख 10 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली। ठगी का अहसास होने पर रंजना ने नोएडा साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
क्राइम ब्रांच का अधिकारी बता हुई साइबर ठगी
अपनी शिकायत में रंजना ने बताया कि 7 अगस्त को उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को डीएचएल कूरियर सर्विस से बताते हुए बताया कि उनके नाम आए पार्सल में उनका आधार कार्ड और ड्रग्स के साथ अन्य प्रतिबंित सामान है। इस जानकारी से घबराई रंजना को जल्द ही दूसरी कॉल पर भेजा गया, जहां लाइन पर मौजूद व्यक्ति ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। बाद में पता चला कि यह झूठ था। तथाकथित अधिकारी ने स्काइप वीडियो कॉल पर उसे धमकाना शुरू कर दिया।
किसी से संपर्क की स्थिति में कानूनी कारवाई का डर
नकली अधिकारी ने उसे चेतावनी दी कि अगर उसने उनकी मांगें पूरी नहीं कीं तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डरी हुई रंजना जाल में फंस गई और उसे धोखा देकर संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी दे दी गई। अपराधियों ने उस पर गोपनीय जानकारी साझा करने का दबाव बनाया, जिसका उसने विरोध किया। फिर उन्होंने पैसे की मांग की, उस पर लगातार दबाव बनाते हुए उसे निगरानी में रखा और किसी से भी संपर्क करने से रोका।
महिला से 10 लाख की साइबर ठगी
8 अगस्त की सुबह, जालसाजों ने उसकी परेशानी को हल करने के लिए पैसे की मांग की। उन्होंने उसे अपने खाते से सभी धनराशि को एक निर्दिष्ट खाते में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया, जिसे उन्होंने ZWIGATO RR Enterprises नाम से प्रदान किया था। घबराहट की स्थिति में, रंजना ने बिना कोई अपराध किए, पहले ₹5 लाख और फिर ₹4.7 लाख, कुल मिलाकर दो दिनों में ₹9.7 लाख ट्रांसफर कर दिए। पैसे िलने के बावजूद, अपराधियों ने उसे 9 अगस्त तक डिजिटल गिरफ्तारी में रखा।

