Delhi Assembly Elections: दिल्ली विधानसभा चुनाव में आज सुबह 7 बजे से मतदान जारी है। राजधानी की 70 विधानसभा सीटों पर मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि मतदान शुरू होने से पहले चुनाव आयोग द्वारा मॉक पोल क्यों कराया जाता है? आखिर मतदान से पहले नकली वोट डलवाने की जरूरत क्यों पड़ती है? आइए जानते हैं मॉक पोल की प्रक्रिया और उसके महत्व के बारे में।
क्या होता है मॉक पोल?
मतदान के दिन असली वोटिंग शुरू होने से पहले हर पोलिंग बूथ पर मॉक पोल कराया जाता है। इसमें चुनाव अधिकारियों की मौजूदगी में ईवीएम की कार्यप्रणाली को जांचने के लिए नकली वोट डलवाए जाते हैं। मॉक पोल में चुनाव में खड़े सभी उम्मीदवारों और नोटा (NOTA) के सामने लगे बटन को रैंडम तरीके से दबाया जाता है। इस दौरान कम से कम 50 बार बटन दबाकर ईवीएम की जांच की जाती है।
मॉक पोल की प्रक्रिया
- पोलिंग एजेंट की मौजूदगी: मॉक पोल के समय पोलिंग बूथ पर उपस्थित एजेंट बटन दबाते हैं। अगर एजेंट उपलब्ध नहीं होते हैं, तो यह काम मतदान अधिकारी करते हैं।
- ईवीएम की जांच: अगर किसी मशीन में बटन दबाने पर बीप की आवाज नहीं आती है, तो उस ईवीएम को बदला जाता है।
- प्रमाण पत्र तैयार किया जाता है: मॉक पोल पूरा होने के बाद, पीठासीन अधिकारी इसकी दो प्रतियों में प्रमाण पत्र तैयार करते हैं, जिस पर पोलिंग एजेंटों के हस्ताक्षर लिए जाते हैं।
- सेक्टर ऑफिसर को रिपोर्ट: हर पोलिंग स्टेशन से सेक्टर ऑफिसर को मॉक पोल प्रमाण पत्र सौंपा जाता है, जिसे बाद में रिटर्निंग अफसर के पास भेजा जाता है।
मॉक पोल क्यों होता है जरूरी?
चुनाव आयोग निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए कई उपाय करता है। उंगली पर अमिट स्याही लगाने से लेकर ईवीएम की सुरक्षा जांचने तक, कई प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं। मॉक पोल भी इसी का एक हिस्सा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि मतदान के दौरान कोई तकनीकी खामी न हो।
मॉक पोल के जरिए चुनाव अधिकारियों को पहले ही पता चल जाता है कि कोई ईवीएम खराब तो नहीं है। इससे मतदान के दौरान किसी भी गड़बड़ी से बचा जा सकता है। यही कारण है कि हर चुनाव में मॉक पोल को एक अनिवार्य प्रक्रिया के रूप में अपनाया जाता है।
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चुनाव आयोग की सख्ती
चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करता है कि मॉक पोल पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से हो। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी माइक्रो ऑब्जर्वर और सेक्टर ऑफिसर भी करते हैं। यदि किसी मशीन में खराबी पाई जाती है, तो उसे तुरंत बदला जाता है ताकि मतदान प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए।

