लखनऊ: उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने आवंटियों को कब्जा देने से संबंधित 250 मामलों को रेरा के लखनऊ मुख्यालय और एनसीआर कार्यालय में नियुक्त एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर्स के न्यायालयों में भेजने का निर्णय लिया है। यह निर्णय उन मामलों को लेकर लिया गया है जहाँ प्रोमोटर द्वारा आवंटियों को समय पर कब्जा नहीं दिया गया है, जिसके कारण उन्हें गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
निर्णय की पृष्ठभूमि
अक्टूबर 2022 में यूपी रेरा ने यह निर्णय लिया था कि रजिस्ट्री और कब्जा से संबंधित आदेशों का कार्यान्वयन एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर्स के न्यायालयों के माध्यम से किया जाएगा। यह निर्णय तब लिया गया था ब यह स्पष्ट हुआ कि कई प्रोमोटर्स जानबूझकर कब्जा देने में देरी कर रहे थे। इस स्थिति को सुधारने के लिए अध्यक्ष ने कड़ा रुख अपनाया है और निर्देश दिया है कि किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर्स की भूमिका
एडज्यूडिकेटिंग ऑफिसर्स, जो पूर्व में जिला जज रह चुके हैं, सीपीसी (सिविल प्रोसीजर कोड) की शक्तियों का उपयोग कर न केवल कब्जा दिलाएंगे, बल्कि आदेशों का पालन न करने के लिए प्रोमोटर्स पर भारी अर्थदण्ड भी लगाएंगे। इसके तहत 130 मामले यूपी रेरा मुख्यालय और 120 मामले एनसीआर कार्यालय से भेजे गए हैं।
ये भी पढ़ें..
Waqf Amendment Bill : लोकसभा में पेश हुआ वक्फ संशोधन विधेयक, जानिए नए बिल में क्या नया है ?
प्रोमोटर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई
यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने स्पष्ट किया कि रेरा प्रोमोटर्स द्वारा आदेशों के अनुपालन में किसी भी प्रकार की मनमानी को स्वीकार नहीं करेगा। रेरा आवंटियों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाएगा और स्थिति की नियमित समीक्षा करेगा ताकि हितधारकों की भलाई सुनिश्चित की जा सके।

