उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि भगवा पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच मतभेद हैं। साथ ही, हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में भाजपा को मिली करारी हार के बाद दोनों नेताओं के बीच दरार और भी बढ़ गई है।
संगठन हमेशा सरकार से बड़ा होता है : मौर्य
मौर्य ने भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ बैठक के एजेंडे पर टिप्पणी की, उनकी “संगठन हमेशा सरकार से बड़ा होता है” वाली टिप्पणी पार्टी की राज्य इकाई के भीतर मचे कोलाहल के बारे में बहुत कुछ कहती है। इससे पहले लखनऊ में भाजपा की राज्य कार्यकारिणी की बैठक के दौरान सीएम योगी ने कहा था कि कार्यकर्ताओं और उम्मीदवारों के अति आत्मविश्वास ने यूपी में भगवा पार्टी की उम्मीदों को चोट पहुंचाई है।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, निजी बातचीत में, लोकसभा चुनावों में असफल रहे नेताओं सहित कई भाजपा राज्य नेताओं ने मुख्यमंत्री के दृष्टिकोण की आलोचना की है, तथा इसे लोकसभा चुनावों में पार्टी की हार में एक प्रमुख कारक बताया है।
लोकसभा में हार के बाद बीजेपी में बढ़ा तकरार
इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान पूर्व मंत्री संजीव बालियान और संगीत सोम के बीच हुई नोकझोंक भगवा पार्टी की राज्य इकाई में दरार की गवाही दे रही है। संजीव बालियान को गृह मंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है जबकि संगीत सोम को योगी आदित्यनाथ का समर्थन प्राप्त है।चुनाव विश्लेषकों के विश्लेषण के अनुसार, भाजपा ने मुजफ्फरनगर की अहम सीट आपसी कलह के कारण गंवा दी, क्योंकि दोनों दिग्गज पूरे चुनाव के दौरान एक-दूसरे से भिड़ते रहे। राजपुत का मजबूत चेहरा होने के कारण संगीत सोम ने वोटों का एक बड़ा हिस्सा अलग कर दिया, जो अन्यथा बालियान को जाता।
दिल्ली आने की मुख्य वजह क्या
हालांकि, दिल्ली में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात को लेकर भाजपा नेताओं ने ‘सब ठीक है’ का पोस्टर लहराते हुए कहा कि मौर्य पार्टी आलाकमान से आगामी उपचुनावों पर चर्चा करने के लिए दिल्ली आए हैं। कई नेताओं ने कहा है कि आगामी 2027 के चुनाव जीतने के लिए बदलाव जरूरी होंगे। मीडिया सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में फिलहाल बदलाव पर कोई विचार नहीं है, लेकिन उपचुनावों के नतीजों पर कड़ी नजर रहेगी।

