प्रयागराज में हुए उमेश पाल की हत्या को लेकर नए नए एंगल सामने आ रहें हैं। रोज नए खुलासे हो रहें हैं और पुलिस जितने भी खुलासे कर रही है सब काफी चौंकाने वाले हैं। अब पुलिस ने नया खुलासा करते हुए बताया है कि हत्याकांड की साजिश बरेली जेल के गोदाम में रची गई थी। बरेली जेल में बंद अशरफ से जेल अफसरों के हुक्म से गैरकानूनी मुलाकातें कराई जाती थी। डीआईजी की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है। इसमें जेलर राजीव मिश्रा और डिप्टी जेलर दुर्गेश प्रताप सिंह शामिल थे।
वहीं लगातार प्रयागराज पुलिस के हाथ अभी भी असल आरोपी को पकड़ नहीं पाएं हैं उनके हाथ अभी भी खाली हैं। सीसीटीवी में गोली चलाने वाले अपराधियों की इनाम राशि तो बढ़ती जा रही लेकिन असल आरोपी किस बिल में जाकर छुपके बैठ गए हैं कि किसी के हाथ भी नहीं आ रहें हैं। दूसरी तरफ STF की टीम ने सफलता हासिल करते हुए अतीक अहमद के एक और करीबी को कौशांबी से धर दबोचा था।
एसटीएफ ने मंगलवार (14 मार्च) की रात करारी कोतवाली के नेवारी गांव में दबिश देकर महमूद उर्फ गुड्डू राइफल को हिरासत में लिया। जेल में उमेश पाल की हत्या की प्लानिंग में जेल के अधिकारियों को अतीक की गैंग के लोग मोटी रकम देते थे इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं जेल में किस तरह से धड़ल्ले से प्लान को अंजाम दिया जा रहा था और जेल अधिकारी मोटी रकम को लेकर अपना पेट भरने में लगे हुए थे।
सुरक्षा व्यवस्था और नियमों का उल्लंघन जेल में धड़ल्ले से किया जा रहा था। जांच रिपोर्ट से पता चला है कि जेल में बंद अतीक के भाई अशरफ से गोदाम में मिलने के लिए छह-सात लोग मिलने आते थे। इसके लिए 3-4 आईडी का ही इस्तेमाल किया जाता था। बरेली जेल में रची गई इस साजिश को लेकर अब बरेली पुलिस भी एक्शन मोड में आ गई है और जाल बिछाते हुए बरेली पुलिस ने तीन टोल्स से तकरीबन बीस हजार गाड़ियों का डाटा लिया है। इसमें से प्रयागराज के नंबर (यूपी 70) की करीब 500 गाड़िया रडार पर है। अब उनके मालिकों तक पहुंच कर कातिलों तक पहुंचने की कोशिश की जायेगी।

