तुर्किये और सीरिया में आए दिल दहला देने वाली जलजले ने भारी तबाही मचाई है। एक के बाद एक आए कई भूकंप के झटकों ने खौफनाक मंजर पैदा कर दिया है। चारों तरफ चीख पुकार की आवाज सुनाई दे रही है। ज़िंदा लोगों को मलबे से बाहर निकालने की भरपूर मशक्कत की जा रही है। बता दें कि तुर्किये और सीरिया में आई विनाशकरी भूकंप से अबतक 4600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी हैं और 10 हजार से अधिक लोग घायल हुए है। इस दर्दनाक प्राकृतिक आपदा के बाद भारत ने तुर्किये के तरफ मदद का हांथ बढ़ाया है।
भारत ने तुर्किये को राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ की दो टीमें भेजी हैं। इसमें पांच महिला कर्मियों, चार खोजी कुत्ते समेत 101 सदस्य हैं। एनडीआरएफ की एक टीम मंगलवार सुबह ही पहुंच चुकी है। एनडीआरएफ की दूसरी टीम कमांडिंग ऑफिसर गुरमिंदर सिंह के नेतृत्व में कोलकाता से रवाना हुई है। बता दें कि इस टीम में डॉक्टर को भी भेजा गया है। इस टीम में प्रशिक्षित चिकित्सकों और पैरा मेडिक की टीम भी आवश्यक दवाओं के साथ रवाना की गई है।
भारत द्वारा भेजे गए मदद के उपरांत तुर्किये ने भारत को शुक्रिया कहा है। भारत में तुर्किये के राजदूत फिरात सुनेल ने ट्विटर पर लिखा, “दोस्त शब्द तुर्किये और हिंदी में आम शब्द है। हमारे यहां एक कहावत है, जरूरत में काम आने वाला दोस्त ही दोस्त होता है सहायता के लिए शुक्रिया।
बहरहाल, संसद के बजट सत्र की कार्यवाही से पहले भाजपा की संसदीय दाल की बैठक बुलाई गयी थी। बैठक को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को तुर्किये और सीरिया में आए भूकंप से हुई मौतों पर गहरा शोक जताया है। शोक व्यक्त करने के दौरान पीएम मोदी काफी भावुक हो गए और गुजरात के भुज में 2001 में आए विनाशकारी भूकंप को याद किया, जिसमें हजारों लोगों की जान चली गई थीं। प्रधानमंत्री ने उस समय गुजरात में चलाए गए राहत और बचाव कार्य के दौरान आई चुनौतियों का जिक्र किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, मैं अच्छी तरह समझ सकता हूं कि इस वक्त तुर्किये के साथ क्या स्थिति उत्पन्न हो रही होगी। बता दें कि 2001 में गुजरात में जब भयंकर भूकंप आया था तब तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ही थे। उस विनाशकारी भूकंप से 20,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थीं। इस तबाही में डेढ़ लाख से अधिक लोग घायल हुए थे। भूकंप ने हजारों लोगों को बेघर कर दिया था।

