आज से आधिकारिक रूप से ब्रज में होली का आगाज हो गया है। ब्रज की होली के पावन पर्व का पहला दिवस। जब भगवान श्री कृष्ण ने राधा रानी और गोपियों के संग फूलों से होली खेली थी और तबसे इस दिन को फूलेरा दूज के नाम से इस पर्व को बड़ी ही धूमधाम से मनाया जाने लगा। ब्रज भूमि में तो फूलेरा दूज का जश्न बड़ा ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस फूलों की होली खेलने के लिए लोग दूर दूर से ब्रज की इस होली का आनंद लेने पहुंचते हैं।
यह पर्व राधाकृष्ण के प्रेम प्रतीक को लेकर मनाया जाता है। राधाकृष्ण ने दुनिया को प्रेम का सही अर्थ समझाया लेकिन प्यार को लेकर आज देश में सिर्फ शारीरिक संबध माना जाता है खिलवाड़ करके मौत के घाट उतार दिया जाता है। सही मायने राधाकृष्ण जैसा पवित्र प्रेम आज के समय में नामुमकिन सा हो गया है। खैर ये बात को छोड़कर बताते हैं कि आज के दिन कोई भी शुभ कार्य करना काफी फलदायक माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विवाह और दूसरे मांगलिक कार्य करना बेहद शुभ माना जाता है। कहते हैं इसी दिन राधेकृष्ण का विवाह ब्रह्माण्ड में ब्रह्मा जी ने करवाई थी। जो भी प्रेमी जोड़ा इस दिन सच्चे मन से भगवान श्रीकृष्ण और राधा जी की पूजा करता है उसे जीवनभर के लिए एक-दूसरे का साथ मिलता है। ब्रज के मंदिरों में आज के दिन श्री कृष्ण और राधा रानी को फूलों से सजाया जाता है और उन पर जमकर फूल बरसाए जाते हैं।
फूलों की बरसात से ब्रज में आज के दिन और महक उठता है। इस दिन घर में भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा अर्चना करने का विधान है। इस दिन घर के मंदिर में श्रीकृष्ण और राधा रानी सहित सभी देवी देवताओं को इस दिन अबीर और गुलाल अर्पित करना चाहिए। रंग-बिरंगे कपड़े भगवान कृष्ण को पहनना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन से होली की शुरुआत होती है। अक्षत और दूर्वा से भगवान का पूजन करना चाहिए और उन्हें फूल, फल, मिठाई का भोग लगाना चाहिए।
फुलेरा दूज के दिन श्रीकृष्ण और राधा रानी के साथ फूलों की होली खेलने का विधान है इसके साथ ही उन्हें माखन मिश्री का भोग भी लगाया जाता है। अगर आपके वैवाहिक जीवन में समस्या चल रही है या प्रेम प्रसंग में कोई दिक्कत आ रही है तो आज के दिन राधेश्याम की पूजा करने से चल रही दिक्कतों का निवारण भी मिल सकता है।
फुलेरा दूज का यह पूरा दिन ही बेहद शुभ है लेकिन पूजा के लिए गोधुली मुहूर्त सबसे अच्छा है। पूजा के समय रंगीन और साफ कपड़े पहनें। प्रेम संबंधों में सुधार के लिए पूजा कर रहे हैं तो गुलाबी कपड़े पहनें। वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियों को खत्म करने के लिए पूजा कर रहे है तो पीले रंग के कपड़े पहनें। पूजा के बाद सात्विक भोजन ही ग्रहण करें।

