स्वामी प्रसाद मौर्य अपने बयानों को लेकर चर्चाओं में रहते हैं जहां अभी देश में हिंदू राष्ट्र को लेकर माहौल बना हुआ तो वहीं मौर्य ने हिंदू की आस्था को चोट पहुंचा दी है उन्होनें ट्विट करते हुए कहा कि हिंदू मंदिर बौद्ध मठों को तोड़कर बनाए गए हैं।
बद्रीनाथ मंदिर को लेकर भी स्वामी प्रसाद मौर्य ने दावा किया कि वो बौद्ध मठ था और बाद में तोड़कर बद्रीनाथ धाम कर दिया गया स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा अगर ASI ज्ञानवापी का सर्वे कर सकती है तो फिर बाकी अन्य मंदिरो का भी सर्वे किया जाना चाहिए क्योंकि जितने भी हिंदू धार्मिक स्थल में उनमें से ज्यादातर मंदिर पहले बौद्ध मठ थे जिन्हें तोड़कर बाद में मंदिर बनाया गया था। वहीं मौर्य के इस बयान पर सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपनी प्रतिक्किया दी और कहा कि कि ‘महाठगबंधन’ की सदस्य सपा के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य का यह बयान उनकी देश और धर्म विरोधी सोच को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रसाद के नाम के आगे स्वामी है। कम से कम उन्हें ऐसा बयान देने से पहले सोचना चाहिए।
धामी ने इसके लिए ट्वीट भी किया और कहा कि ऐसा विचार SIMI और PFI की विचारधारा के वर्चस्व को भी प्रकट करता है। अपने ट्वीट में धामी ने लिखा, ‘करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र भू बैकुंठ श्री बदरीनाथ धाम पर समाजवादी पार्टी के नेता द्वारा की गई टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है। यह विचार इन दलों के अंदर SIMI और PFI की विचारधारा के वर्चस्व को भी प्रकट करता है।
आखिर मिर्ची लगी न, अब आस्था याद आ रही है। क्या औरों की आस्था, आस्था नहीं है? इसलिए तो हमने कहा था किसी की आस्था पर चोट न पहुँचे इसलिए 15 अगस्त 1947 के दिन जिस भी धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे यथास्थिति मानकर किसी भी विवाद से बचा जा सकता है। अन्यथा ऐतिहासिक सच स्वीकार करने के…
— Swami Prasad Maurya (@SwamiPMaurya) July 28, 2023
स्वामी प्रसाद मौर्य ने सीएम धामी की बात का पलटवार करते हुए ट्विट कर लिखा लगी न मिर्ची, अब आस्था याद आ रही है क्या औरों की आस्था, आस्था नहीं है? इसलिए किसी भी आस्था को चोट पहुंचाए बिना 15 अगस्त 1947 में जो स्थिति थी उसे ही माना जाए क्योंकि अगर गड़े मुद्दे उखड़ने शुरू हुए तो बात बहुत बढ़ेगी और हम ऐसा नहीं चाहते। देश में भाईचारा बने रहे, शांति बनी रहे वो ही अच्छा होगा।

