देश के सर्वोच्च न्यायालय ने वन रैंक वन पेंशन का बकाया भुगतान नहीं करने पर केंद्र सरकार से सख्त नाराजगी जताई है। सर्वोच्च न्यायलय ने साफ किया कि केंद्र सरकार को पेंशन का बकाया भुगतान किश्तों में देने का नोटिफिकेशन वापस लेना होगा। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार से मामले में 20 मार्च तक संक्षिप्त नोट मांगा है।
बता दें कि सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से यह बताने को निर्देश दिया है कि अब तक वन रैंक वन पेंशन को लेकर क्या भुगतान किया गया है और भविष्य में कैसे भुगतान करेंगे। कोर्ट ने कहा कि यह बहुत दुख भरा है कि चार लाख सैन्यकर्मियों की मृत्यु हो गई है। कोर्ट ने कहा कि रक्षा मंत्रालय कानून को अपने हाथ में लेने का प्रयास ना करे।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 फरवरी को रक्षा मंत्रालय को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि वन रैंक वन पेंशन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करना होगा। कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय में पेंशन मामलों के सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया था।
एरियर के इंतजार में चार लाख पेंशनर्स की मौत
दरअसल, 20 जनवरी को रक्षा सचिव ने एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा था कि वो वन रैंक वन पेंशन के तहत पेंशन को चार किश्तों में देंगे, जबकि 9 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को कहा था कि 15 मार्च तक सभी को भुगतान किया जाए। इतना ही नहीं, चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि वन रैंक वन पेंशन के उसके पहले आदेश के मुताबिक सभी पेंशनर्स को एरियर का भुगतान किया जाए।
बता दें कि सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील हुफेजा अहमदी ने कोर्ट को बताया था कि करीब चार लाख पेंशनर्स की इस इंतजार में मौत हो गई कि उनके पेंशन का एरियर मिलेगा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 16 मार्च, 2022 को सेना में वन रैंक वन पेंशन पर मुहर लगा दी थी। याचिका इंडियन एक्स सर्विसमैन मूवमेंट ने दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि संसद में वादा करने के बावजूद वन रैंक वन पेंशन का वादा पूरा नहीं किया गया।

