देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र सरकार को एक बड़ा झटका दिया है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र सरकार की क्यूरेटिव पिटीशन को खारिज कर दिया है। केंद्र सरकार ने भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के लिए और अधिक मुआवजा बढ़ाने की मांग कर रही थी। केंद्र सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि 1989 में जब सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजा तय किया था, तब 2.05 लाख पीड़ितों को ध्यान में रखा गया था।
इन वर्षों में गैस पीड़ितों की संख्या ढाई गुना से अधिक बढ़ गयी है। जिसकी संख्या बढ़कर 5.74 लाख से अधिक हो चुकी है। ऐसे में मुआवजे की राशि भी बढ़नी चाहिए। यदि सुप्रीम कोर्ट मुआवजा बढ़ाने को मान जाता है तो इसका लाभ भोपाल के हजारों गैस पीड़ितों को भी मिलेगा। गौरतलब है कि यूनियन कार्बाइड से जुड़े इस मामले में 2010 में ही क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल हुई थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में ही फैसला सुरक्षित रख लिया था और अब 12 साल बाद इसपर फैसला आया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में डाउ केमिकल्स ने साफ किया था कि वह एक रुपया भी और देने को तैयार नहीं है।
क्या है पूरा मामला ?
साल 1984 में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 2-3 दिसंबर की रात को यूनियन कार्बाइड (अब डाउ केमिकल्स) की फैक्ट्री से मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस का रिसाव हुआ था। इससे सैकड़ों लोगों की मौतें हुई थी। हादसे के 39 साल बाद सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एसके कौल की संविधान पीठ ने 1989 में तय किए गए 725 करोड़ रुपये हर्जाने के अतिरिक्त 675.96 करोड़ रुपये हर्जाना दिए जाने की याचिका पर यह फैसला दिया है।

