आज से एक साल पहले आज ही के दिन और तारीख नोएडा के ट्विन टावर ध्वस्त किए गए थे 3700 किलो का बारूद लगाकर नोएडा के सेक्टर 93ए स्थित एमरॉल्ड कोर्ट सोसाइटी में भ्रष्टाचार की बुनियाद पर खड़े किए गए ट्विन टावर को ध्वस्त कर दिया गया था।
ट्विन टावर के जमींदोज हुए आज हुआ एक साल पूरा
28 अगस्त 2022 ट्विन टावर को जमींदोज कर दिया गया था आज एक साल पूरा हो गया है अभी तक उनके निर्माण के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हो सकी है। इस प्रकरण में शासन की ओर से गठित एसआईटी की जांच के बाद 26 अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था।
ट्विन टावर की जगह लोगों ने बनाया दिया विजय पथ
इस मामले में लंबी लड़ाई लड़ने वाले और सोसाइटी की एओए के अध्यक्ष यूबीएस तेवतिया ने कहा कि आरोपी अफसरों के खिलाफ सबसे पहले कार्रवाई होनी चाहिए थी, आज एक साल बीत गया, लेकिन अभी तक कार्रवाई न होना दुखद है। जल्द जांच पूरी होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि जहां टि्वन टावर थे वहां लोगों ने विजय पथ बनाया है। विजय पथ दर्शाता है कि कैसे सोसाइटी के लोगों ने एकजुट होकर लंबे संघर्ष के बाद जीत हासिल की थी।
सिलसिले वार समझते है दोनों जांच में अब तक क्या हुआ…… वो रिपोर्ट जिसके आधार पर विजिलेंस लखनऊ में दर्ज हुई एफआईआर
एसआईटी की रिपोर्ट में सुपरटेक की ओर से नियमों का उल्लंघन किया गया। प्राधिकरण अधिकारियों ने बिल्डर को लाभ पहुंचाया। इसके लिए प्राधिकरण अधिकारियों को आर्थिक लाभ भी मिला। 7 सितंबर 2021 को एसआईटी की टीम ने नोएडा प्राधिकरण में नोएडा की सीईओ , एसीईओ और नियोजन विभाग के साथ बैठक की। इस बैठक में सुपरटेक टि्वन टावर के पत्रावली प्रस्तुत की गई। 8 सितंबर को नोएडा प्राधिकरण में एनबीसीसी के साथ बैठक की गई और अगले दिन टि्वन टावर का भ्रमण किया गया। एसआईटी की टीम ने प्राधिकरण को 9 , 10, 12 और 15 सितंबर तक सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा।
एसआईटी का इन 15 प्वांइट पर ये था आबजेक्शन….
टावर-16 और टावर -17 के निर्माण के लिए 26 नवंबर को स्वीकृति दी गई। लेकिन निर्माण पांच माह पहले जुलाई 2009 में शुरू हो चुका था।
निर्माण शुरू होने के बाद सितंबर 2009 के बाद आईआईटी रुड़की ने स्ट्रक्चरल सेफ्टी प्रमाण पत्र जारी किया।
एसआईटी ने आबेजेक्शन लगाया कि यहां प्राधिकरण को अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करनी चाहिए लेकिन उसने नहीं की।
सुपरटेक ने टि्वन टावर में डबलबेसमेंट का निर्माण शुरु किया। जबकि 2009 में टावर-16 ग्राउंड 11 फ्लोर एंव शापिंग ब्लाक सिंगल बेसमेंट के साथ अनुमति थी।
आईआईटी रूढ़की के प्रोफेसर ने एक रिपोर्ट दी जिसमे बताया कि 22 सितंबर 2009 टावर-16 और टावर-17 की फाउंडेशन 2B+G+38 तलों के स्ट्रक्चरी सेफ है। टावर-16 (G+40) और टावर-17 (G+39) प्राधिकरण में विचाराधीन है।
टावर-1 और टावर-17 के बीच की दूरी 36.5 होनी चाहिए यहां दूरी 9 मीटर थी और नक्शा पास कर दिया गया।
टावर-1 के सामने ग्रीन एरिया पास था लेकिन यहां टि्वन टावर पास किया गया।
सुपरटेक ने से कार्य बिना ओनरशिप ऑफ फ्लैट एक्ट 1975 का पालन नहीं करते हुए किया।
उच्चतम न्यायालय की ओर टिप्पणी के बाद भी प्राधिकरण ने कार्यवाही नहीं की।
टि्वन टावर में स्ट्रक्चार डिजाइन के संबंध में कोई प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया।
सुपरटेक ने 2.75 एफएआर पर्चेस किया और भवन नियमावली 2010 का उल्लघंन करते हुए टि्वन टावर की ऊचाई 73 मीटर से बढ़ाकर 121 मीटर यानी ग्राउंड प्लस-24 से ग्राउंड प्लस 40 कर दी गई। इसमें आरडब्ल्यूए से अनापत्ति प्रमाण पत्र तक नहीं लिया गया।
एनबीसीसी ने भी अपनी रिपोर्ट में दोनों टावरों के बीच की दूरी को गलत बताया।
इस मामले में डाली गई आरटीआई का जवाब नहीं दिया गया।
स्वीकृत मानचित्रों का डिस्प्ले साइट पर नहीं किया गया।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने अलग अलग समय पर कई नोटिस दिए लेकिन कार्यवाही नहीं की।
ये फोटो मार्च 2023 की है जिसमें प्रोजेक्ट हेड मयूर मेहता और वरिष्ठ प्रबंधक नियोजन देवेंद्र निगम मौजूद है। टावर में निकले 80 हजार मीट्रिक टन मबले से करीब 56 हजार मीट्रिक टन मलबा साफ किया जा चुका है। शेष मलबा से पाथ वे बनेगा।
ये फोटो मार्च 2023 की है जिसमें प्रोजेक्ट हेड मयूर मेहता और वरिष्ठ प्रबंधक नियोजन देवेंद्र निगम मौजूद है। टावर में निकले 80 हजार मीट्रिक टन मबले से करीब 56 हजार मीट्रिक टन मलबा साफ किया जा चुका है। शेष मलबा से पाथ वे बनेगा।
अब जानते है उन अधिकारियों के नाम जिनके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर
एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर नोएडा प्राधिकरण के नियोजन विभाग की ओर से विजिलेंस लखनऊ में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें तत्कालीन सीईओ मोहिंदर सिंह, एसके द्विवेदी, एसीईओ आरपी अरोड़ा, ओएसडी यशपाल सिंह, सहयुक्त नगर नियोजक ऋतुराज व्यास, नगर नियोजक एके मिश्रा, वरिष्ठ नगर नियोजक राजपाल कौशिक, मुख्यवास्तु विधि त्रिभुवन सिंह, उप महाप्रबंधक शैलेंद्र कैरे, परियोजना अभियंता बाबू राम, प्लानिंग असिस्टेंट टीएन पटेल,वीए देवपुजारी मुख्य वास्तुविद, अनीता प्लानिंग असिस्टेंट , मुकेश गोयल, प्रवीण श्रीवास्तव, ज्ञान चंद , राजेश कुमार , विमला सिंह , विपिन गौड़ , एमसी त्यागी, केके पांडे, पीएम बाथम, एसी सिंह का नाम शामिल है।
चार को किया जा चुका है निलंबित…
इस मामले में नोएडा प्राधिकरण से गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण के प्लानिंग मैनेजर मुकेश गोयल, नोएडा प्राधिकरण की प्लानिंग असिस्टेंट विमला सिंह, यूपीएसआईडीसी में तैनात प्लानिंग असिस्टेंट अनीता व यमुना प्राधिकरण के प्रभारी जीएम प्लानिंग ऋतुराज हैं। इन चारों को शासन स्तर से निलंबित किया जा चुका है।
अब जानते है ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव को सौंपी गई जांच के बारे में …
शासन ने इनमें से 11 अधिकारियों की जांच 23 मार्च को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी सौम्य श्रीवास्तव को सौंपी गई थी, लेकिन अभी तक जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने जवाब भी जांच अधिकारी को नहीं सौंपे हैं। विजिलेंस स्तर पर भी इस मामले में अभी तक जांच जारी है। पिछले चार माह से विजिलेंस की टीम नोएडा नहीं आई है। कोई भी वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
शासन स्तर से अभी तक कार्रवाई नहीं हो सकी है। जांच अधिकारी सौम्य श्रीवास्तव ने बताया कि अभी तक सिर्फ सात आरोपियों ने उन्हें अपने जवाब दिए हैं और वे भी अधूरे हैं। चार आरोपी अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया। उन्हें पत्र भेजकर 15 दिन में जवाब मांगें हैं। जवाब आने पर वह एक माह में शासन को रिपोर्ट दे देंगे।
आरोप पत्र जारी होने के बाद इन अधिकारियों व कर्मचारियों ने अपना जवाब प्राधिकरण के दे दिया है। जवाब देने वालों में तत्कालीन प्लानिंग असिस्टेंट टीएन पटेल, नगर नियोजक अशोक कुमार मिश्र, सहायक प्रबंधक अनीता, ऋतुराज व्यास सीनियर मैनेजर प्लानिंग, प्रॉजेक्ट इंजीनियर बाबूराम, विमला सिंह तत्कालीन सहयुक्त नगर नियोजक, एम सी त्यागी तत्कालीन प्रोजेक्ट इंजीनियर, मुकेश गोयल मैनेजर प्लानिंग शामिल हैं।

