पत्रकारिता जगत में वरिष्ठ पत्रकार डॉ. वेद प्रताप वैदिक का निधन हो गया। 78 साल की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। डॉ. वेद प्रताप वैदिक को सुबह गुडगाँव स्थित निवास पर अटैक आया था। जानकारी के मुताबिक़ उनका अंतिम संस्कार इंदौर में किया जाएगा।
डॉ. वेद प्रताप वैदिक के निधन से देश के पत्रकारिता जगत में शोक की लहर छा गई। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने उनके निधन को पत्रकारिता जगत के युग का अंत बताया।
डॉ. वेद प्रताप वैदिक को हिंदी के सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले, हिंदी के लिए आंदोलन करने और अंग्रेजी के मठों और गढ़ों में उसे उसका सम्मान दिलाने वाले अग्रणी पत्रकार के रूप में जाना जाता है। लेखन और अनुभव की व्यापकता के चलते वे हिंदी पत्रकारिता के पर्याय बन गए थे।
डॉ. वैदिक ने मध्यप्रदेश की संस्कारधानी ‘नई दुनिया’ इंदौर से पत्रकारिता की शुरुआत की और फिर दिल्ली में ‘नवभारत टाइम्स’ से लेकर ‘भाषा’ के संपादक तक का बेमिसाल सफर तय किया।
जब कन्नड़ भाषी एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने थे तो उन्हें भी हिंदी सिखाने की जिम्मेदारी डॉक्टर वैदिक ने निभाई थी। डॉक्टर वैदिक ने हिंदी को साहित्य, समाज और हिंदी पट्टी की राजनीति की भाषा से निकाल कर राजनय और कूटनीति की भाषा भी बनाई।
डॉक्टर वैदिक ने पत्रकारिता, राजनीतिक चिंतन, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, और हिंदी के क्षेत्र में लंबे समय तक काम किया। अंतरराष्ट्रीय मामलों में जानकार होने के साथ ही उनकी रुसी, फारसी, जर्मन और संस्कृत भाषा पर पकड़ रही। उन्होंने अपनी पीएचडी के शोधकार्य के दौरान न्यूयार्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी, मॉस्को के ‘इंस्तीतूते नरोदोव आजी’, लंदन के ‘स्कूल ऑफ ओरिंयटल एंड अफ्रीकन स्टडीज़’ और अफगानिस्तान के काबुल विश्वविद्यालय में अध्ययन और शोध किया
डॉ वैदिक ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में जेएनयू से पीएचडी की थी। वह चार साल तक दिल्ली में राजनीति शास्त्र के टीचर रहे। फिलॉस्फी और राजनीतिशास्त्र में भी उनकी काफी दिलचस्पी रही। उन्होंने न्यूज एजेंसी पीटीआई के हिंदी उपक्रम भाषा की स्थापना की थी और वह उसके पहले संपादक भी थे। इसके अलावा, वह टाइम्स ग्रुप के नवभारत टाइम्स से भी जुड़े रहे। डॉ वैदिक के निधन से मीडिया जगत में शोक की लहर है।

