आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए देश भर की 26 विपक्षी पार्टियां एकजुट हुई थी और अपने गठबंधन का नाम इंडिया रखा था। इसमें यह तय हुआ था कि देश में अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिलकर हराना है और सयुंक्त रणनीति से भाजपा को सत्ता की कुर्सी से बेदखल करना है। इस गठबंधन का अभी ज्यादा ज्यादा दिन भी नहीं हुआ है लेकिन अभी से ही गठबंधन के दलों में तालमेल बैठता नजर नहीं आ रहा है।
दरअसल, आज महाराष्ट्र में एक कार्यक्रम होना था जिसमे प्रधानमंत्री मोदी भी सम्मिलित होने वाले थे। इस वजह से विपक्षी दलों के नेताओं ने एनसीपी प्रमुख शरद पवार से अनुरोध किया था कि वे इस कार्यक्रम में सम्मिलित न हो लेकिन विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ के नेताओं के अनुरोध को ठुकराते हुए एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार मंगलवार को यहां लोकमान्य तिलक पुरस्कार समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उनकी मौजूदगी में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।
‘इंडिया’ की तीसरी बैठक 25 अगस्त को महाराष्ट्र में प्रस्तावित
बता दें कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने ‘इंडिया’ के उन नेताओं और सांसदों से मिलने से भी परहेज किया जो उन्हें इस समारोह में शामिल होने से रोकना चाह रहे थे। लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पहुंचने से पहले विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने दगडूशेठ हलवाई गणेश मंदिर से आधा किलोमीटर दूर मंडई में प्रदर्शन किया। मोदी ने पुणे पहुंचने के बाद सर्वप्रथम इस मंदिर में पूजा-अर्चना की। उधर, कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद पवार) और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन किया।
‘इंडिया’ की तीसरी बैठक 25 अगस्त को महाराष्ट्र में प्रस्तावित है। आज के इस घटनाक्रम के बाद से इस बैठक को लेकर शरद पवार की भूमिका के बारे में तमाम प्रकार के कयास लगाए जाने लगे हैं। हालांकि एनसीपी और शिवसेना (यूबीटी) के नेता भलीभांति यह जानते हैं कि शरद पवार मोदी के साथ मंच साझा भले ही करें, लेकिन वे ‘इंडिया’ के ही साथ रहेंगे। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि भोपाल में मोदी के दिए गए भाषण के बाद अजित पवार एकाएक एनसीपी में टूट का कारण बने। कहीं उसी टूट से पार्टी को बचाने के लिए शरद पवार की यह कोई रणनीति तो नहीं है।

