भारतीय रिजर्व बैंक यानि आरबीआई ने आज मौद्रिक नीति समीक्षा में एक बार फिर नीतिगत दर रेपो को बढ़ा दिया है। रेपो दर में 0.25% की बढ़ोतरी की गयी है। बढ़ोतरी के बाद अब रेपो रेट 6.25% से 6.50% हो गया है। रेपो दर में बढ़ोतरी की जानकारी आज आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस कांफ्रेंस कर दिया है।
बता दें कि 1 फरवरी को बजट पेश होने के बाद पहली बार एमपीसी की बैठक हुई है। यह बैठक पिछले तीन दिनों से चल रही थी। ब्याज दरों पर फैसला लेने के बाद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ब्याज दरों से जुड़ी घोषणा की है। इससे पहले दिसंबर में हुई मीटिंग में ब्याज दरों को 5.90% से बढ़कर 6.25% किया गया था।
गौरतलब है कि रेपो दर में बढ़ोतरी के बाद होम लोन से लेकर ऑटो और पर्सनल लोन तक सब कुछ महंगा हो जाएगा और लोगों को अब ज्यादा EMI चुकानी होगी। हालांकि FD पर अब पहले से अधिक ब्याज दरें मिलेंगी। 1 अगस्तर 2018 के बाद रेपो दर की यह सबसे ऊंची दर है। तब रेपो दर 6.50% थी।
रेपो दर क्या होता है ?
रेपो दर वह ब्याज दर है, जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्रीय बैंक से कर्ज लेती है। इसमें वृद्धि का मतलब है कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिया जाने वाला कर्ज महंगा होगा और मौजूदा ऋण की मासिक किस्त बढ़ेगा
आरबीआई रेपो दर कब और क्यों बढ़ाता या घटाता है ?
रेपो दर एक ऐसा हथियार है जिससे महंगाई पर काबू पाया जा सकता है। जब भी महंगाई अधिक होती है तब रेपो दर को बढ़ा दिया जाता है। रेपो दर बढ़ने से बैंकों को RBI से मिलेने वाला कर्ज महंगा हो जाता है। जिसके बाद बैंक भी अपने ग्राहकों को देने वाली लोन को महंगा कर देती है। लोन महंगा होने के बाद अर्थव्यवस्था में मनी फ्लो कम हो जाती है। मनी फ्लो कम होने से डिमांड में कमी आने लगती है और जब डिमांड में कमी आती है तब महंगाई घट जाती है।
इसके उलट जब अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही होती है तो रिकवरी के लिए मनी फ्लो बढ़ाने की जरूरत पड़ती है। मनी फ्लो बढ़ाने के लिए आरबीआई रेपो दर कम कर देता है। इससे बैंकों को आरबीआई से मिलने वाला कर्ज सस्ता हो जाता है और ग्राहकों को भी सस्ती दर पर लोन मिलता है।

