बलिया और देवरिया में जानलेवा हीट स्ट्रोक से हाहाकार मचा है। इसे देखते हुए रायबरेली का स्वास्थ्य महकमा भी एलर्ट मोड़ पर आ गया है। यहां सभी सीएचसी में विशेष इंतज़ाम के साथ जागरूकता और बचाव पर अधिक जोर दिया जा रहा है।
बलिया और बिहार में हीटस्ट्रोक के हाहाकार से मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बचाव बताते हुए कई बातें कहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी के मुताबिक भीषण गर्मी में चलने वाली गर्म हवाओं को लू कहा जाता है। यही गर्म हवाएं जब शरीर में रोग उत्पन्न करती हैं तो इसे लू लगना या हीट स्ट्रोक कहते हैं उनका कहना है कि जिस प्रकार भीषण गर्मी के साथ तेज़ धूप हो रही है उसमें यथासंभव बाहर निकलने से बचना चाहिए। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर वीरेंद्र सिंह का कहना है कि यदि बाहर निकलना आवश्यक ही हो तो शरीर को पूरा ढंकने वाले कपड़े पहन कर निकलें। सिर और मुहं को अंगौछे से ढांक लें। धूप से बचने के लिए छाते का प्रयोग करें और पानी के साथ ओआरएस का सैशे साथ ले कर चलें।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर वीरेंद्र सिंह ने आगे हीट स्ट्रोक के लक्षणों को बताते हुए कहा कि यदि अचानक शरीर का तापमान बढ़ जाये और नाड़ी तेज़ चलने लगे। शरीर पर लाल चकत्ते दिखाई दें और अर्ध मूर्छित अवस्था में व्यक्ति आये तो तुरंत उसे आइस कोल्ड ट्रीटमेंट देने के साथ ही तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि ज़िला अस्पताल समेत सभी सीएचसी में विशेष तौर पर हीट स्ट्रोक के मरीजों की देखभाल और इलाज के लिए सभी इंतज़ाम कर लिए गये हैं।

