Pranab Mukherjee: केंद्र सरकार ने राजधानी दिल्ली में स्थित ‘राष्ट्रीय स्मृति’ परिसर, जिसे राजघाट परिसर के नाम से भी जाना जाता है, में दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के स्मारक के निर्माण के लिए एक विशेष स्थल को नामित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। लेखिका और प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने ट्वीट करके यह जानकारी साझा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी से मुलाकात की और बाबा के लिए स्मारक बनाने के सरकार के फैसले के लिए दिल से आभार व्यक्त किया। यह और भी सराहनीय है क्योंकि हमने इसके लिए अनुरोध नहीं किया था। मैं प्रधानमंत्री की अप्रत्याशित दयालुता और कृतज्ञता से बहुत अभिभूत हूँ।”
2012 से 2017 तक राष्ट्रपति थे प्रणब मुखर्जी
इसके साथ ही शर्मिष्ठा ने पीएम मोदी से अपनी मुलाकात और केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय की ओर से मिले पत्र को भी सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “बाबा (प्रणब मुखर्जी) कहते थे कि राजकीय सम्मान मांगना नहीं चाहिए, बल्कि खुद ही देना चाहिए। मैं बहुत आभारी हूं कि प्रधानमंत्री मोदी ने बाबा की याद और सम्मान में ऐसा किया। हालांकि, इससे बाबा को कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वे अब इस दुनिया में नहीं हैं और हमेशा प्रशंसा या आलोचना से परे थे। लेकिन उनकी बेटी होने के नाते मैं अपनी खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकती।”
प्रणब मुखर्जी जुलाई 2012 से जुलाई 2017 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। उन्हें 2019 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। कुछ दिनों पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन के बाद जब कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने उनके निधन पर दुख व्यक्त करने के लिए बैठक की और उनके लिए एक स्मारक बनाने का प्रस्ताव पारित किया, तो शर्मिष्ठा मुखर्जी ने सवाल उठाया कि उनके पिता के निधन के बाद कोई बैठक क्यों नहीं बुलाई गई या प्रस्ताव पारित क्यों नहीं किया गया। शर्मिष्ठा ने अपने पिता के निधन के बाद सीडब्ल्यूसी की बैठक न होने पर नाराजगी जताई थी। सीडब्ल्यूसी कांग्रेस की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था है।
शर्मिष्ठा ने कांग्रेस पर उठाए सवाल
उन्होंने सवाल किया, “कांग्रेस को इसके लिए जवाब देना होगा। मैं केवल तथ्य बता सकती हूं। लेकिन मैं यह भी जोड़ना चाहती हूं कि मुझे नहीं पता कि यह जानबूझकर किया गया था या यह सरासर लापरवाही थी। इतनी पुरानी पार्टी में क्या परंपराएं हैं?” शर्मिष्ठा ने ‘पीटीआई वीडियो’ में कहा था, “अगर संस्थागत स्मृति का लोप हो गया है, अगर राहुल गांधी और उनके आस-पास के लोग नहीं जानते कि कांग्रेस ऐसे पिछले उदाहरणों में कैसे काम करती थी, तो यह अपने आप में कांग्रेस के भीतर एक गंभीर और दुखद स्थिति है।”
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कांग्रेस में नेहरू-गांधी परिवार से बाहर के नेताओं के योगदान को मान्यता देने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि (पूर्व प्रधानमंत्री) पी.वी. नरसिम्हा राव के साथ क्या किया गया था।” उन्होंने कहा, “इस मुद्दे और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर कांग्रेस की पूरी मशीनरी, जिसमें उसका सोशल मीडिया भी शामिल है, लगातार मुझे और मेरे पिता को निशाना बना रही थी। मेरे और सबसे महान नेताओं में से एक मेरे पिता के खिलाफ जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया, वह कांग्रेस के पतन की हद को दर्शाता है।”

