2024 के लोकसभा चुनाव को देखते पीएम मोदी ने ऐसा मंत्र फूंका है कि अब बहस तेज हो गई है। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी ने 27 जून को भोपाल में पांच वंदे भारत एक्सप्रेस वे का उद्घाटन किया इसके बाद संबोधन करते हुए मेरा बूथ-सबसे मजबूत’ कार्यक्रम में पार्टी कार्यकर्ताओं के सवालों का जवाब दे रहे थे। उत्तर प्रदेश की भाजपा कार्यकर्ता रानी चौरसिया ने सवाल पूछा कि तीन तलाक और यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर मुस्लिम भाई-बहनों का भ्रम कैसे दूर करें? इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हम देख रहे हैं कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के नाम पर भड़काने का काम हो रहा है। एक घर में परिवार के सदस्य के लिए एक कानून हो, परिवार के दूसरे सदस्य के लिए दूसरा कानून हो, तो क्या वो घर चल पाएगा? फिर ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा। भारत के संविधान में भी नागरिकों के समान अधिकार की बात कही गई है। प्रधानमंत्री के इस बयान से घमासान मच गया है और ये सवाल उठने लगा है कि बीजेपी ने 2024 के चुनाव के लिए इस UCC को अपना कोर ऐंजडा बनाया और तीसरा ब्रह्मास्त्र चला दिया है।
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद बीजेपी को कुछ लोगों का UCC को लेकर समर्थन मिल सकता है तो इसको लेकर कुछ लोंगो के विरोध होने की भी टेंशन भाजपा को है। UCC को लेकर भाजपा को अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी और नवीन पटनायक की बीजेडी को यूसीसी से कोई आपत्ति नहीं है। आंध्र प्रदेश से वाईएसआरसीपी का भी समर्थन मिल सकता है। वहीं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में इसके विरोध की संभावना को लेकर बीजेपी को टेंशन भी है।
पीएम मोदी के ने यूनिफॉर्म सिविल कोड की वकालत की तो इस पर बैठकों का दौर भी शुरू हो गया। ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड ने इस मुद्दे पर चर्चा के लिए एक बैठक बुलाई करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में यूनिफार्म सिविल कोड के कानूनी पहलुओं पर चर्चा की गई। इस बैठक में बोर्ड से जुड़े तमाम वकील मौजूद थे।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस बैठक में फैसला लिया कि यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर एक ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा। इसके अलावा बोर्ड से जुड़े लोग लॉ कमीशन के अध्यक्ष से मिलने का समय मांगेगे। इसके बाद बोर्ड अपना ड्राफ्ट लॉ कमीशन को देगा। बताया गया है कि शरीयत के जरूरी हिस्सों का इस ड्राफ्ट में जिक्र होगा। बोर्ड की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के बयान का भी जिक्र किया गया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान के बाद समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर जमकर बवाल शुरू हो गया। तमाम विपक्षी दलों ने इसे लेकर बीजेपी और मोदी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि चुनाव नजदीक आते ही इस मुद्दे को उछाला जा रहा है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि महंगाई और बेरोजगारी जैसे असल मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री पाकिस्तान से प्रेरणा क्यों ले रहे हैं? ओवैसी ने पूछा कि क्या यूसीसी के नाम पर देश के बहुलवाद और विविधता को छीन लिया जाएगा?

