26 जुलाई के दिन भारत में हर साल कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। इस दिन कई वीर सपूतों ने अपनी जान गवांकर जम्मू-कश्मीर के कारगिल जिले में दुश्मनों ने भारत के हिस्से जो कब्जा कर रखा था वहां देश के जवानों के ने युद्ध लड़के अपनी जान गवांकर तिरंगा फहराया था।
मई और जुलाई के बीच 1999 में हुए कारगिल विजय दिवस में 527 वीर जवानों ने हंसते हंसते अपने देश के लिए कुर्बानी दे दी थी जबकि 1363 जवान घायल हो गए थे। वीर सपूतो ने देश की रक्षा के लिए अपने खून का कतरा कतरा भारत के लिए न्यौछावर कर दिया था।
आज इन वीर सपूतों की वजह से हमारा भारत चैन अमन की स्वतंत्रता से जी पा रहा है। कारगिल युद्ध में सबसे यंग विक्रम बत्रा की साहस की कहानी लोग आज भी याद करते हैं. 4875 की उंची बर्फीली पहाड़ी पर दुश्मनों के खेमे में ग्रेनेड फेंककर मौत के घाट उतार दिया था लेकिन दुश्मन ने एक गोली बत्रा के सीने में चला दी जिससे वो शहीद हो गए। शेरशाह नाम से विक्रम को याद किया जाता है। अपने दोस्त से उन्होनें एक बात बोली थी “या तो मैं तिरंगा फहराकर वापस आऊंगा, या फिर उसमें लिपटकर वापस आऊंगा”।
इसके बाद बात करते हैं कैप्टन अनुज नायर की अकेले उन्होनें पाकिस्तान के 9 सैनिकों को मार गिराया तीन बंकर ध्वस्त किए लेकिन दुश्मनों ने अनुज नायर की तरफ ग्रेनेड फेंका जिससे वो घायल हो गए लेकिन वो भारत के इस सैनिक ने हार नहीं मानी और जाबाजी के साथ लड़े और दुश्मन के आखिरी बंकर को खत्म किया और देश के लिए हंसते हंसते शहदी हो गए।
कैप्टन मनोज पांडे दुश्मन की गोली से घायल हुए लेकिन लहूलुहान के बाद बिना जान की परवाह किए शेर की तरह उन्होनें ग्रेनेड से दुश्मनों के चितड़े चितड़े कर दिए और शहीद हो गए। देश के इन वीर सपूतों की असम्य साहस से आज भारत गुलिस्तां है और वीर सपूतों की वजह से देश हमेशा गुलिस्तां रहेगा।
पीएम मोदी ने कारगिल विजय दिवस पर ट्विट कर देश के वीर सपूतों को याद किया। पीएम ने ट्विट करते हुए लिखा- कारगिल विजय दिवस भारत के उन अद्भुत पराक्रमियों की शौर्यगाथा को सामने लाता है, जो देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणाशक्ति बने रहेंगे। इस विशेष दिवस पर मैं उनका हृदय से नमन और वंदन करता हूं। जय हिंद! वहीं सीएम योगी ने भी ‘कारगिल विजय दिवस’ के अवसर पर, मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारत माता के सभी सपूतों को विनम्र श्रद्धांजलि और नमन किया।

