Noida: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को एनसीआर में 500 करोड़ रुपये की कथित रियल एस्टेट धोखाधड़ी के मामले में तीन प्रमुख बिल्डरों पर छापेमारी की। ये छापे ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, ग्रीनबे इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, और थ्री सी शेल्टर प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालयों सहित उनके प्रमोटरों और निदेशकों के परिसरों पर मारे गए। प्रमुख प्रमोटरों में विजय गुप्ता, अमित गुप्ता और सरदार निर्मल सिंह शामिल हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू
यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। ईडी ने बताया कि यह जांच दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा और गुरुग्राम पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई। इन एफआईआर में घर खरीदारों की याचिकाओं का उल्लेख है, जिन्होंने इन कंपनियों की परियोजनाओं में निवेश किया और धोखाधड़ी का शिकार हुए।
1,000 करोड़ में से 500 करोड़ का डायवर्जन
सूत्रों के अनुसार, इन कंपनियों ने घर खरीदारों और निवेशकों से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई, लेकिन इसमें से केवल 500 करोड़ रुपये ही परियोजनाओं पर खर्च किए। बाकी धनराशि को फर्जी बिक्री और बिना मंजूरी वाली जमीनों में निवेश के माध्यम से डायवर्ट कर दिया गया। आरोप है कि प्रमोटरों ने जानबूझकर लाभ कमाने के लिए यह गबन किया, जिसके कारण कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं।
एक दर्जन परिसरों पर छापे
ईडी ने दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में करीब एक दर्जन स्थानों पर छापेमारी की। इन छापों में रियल एस्टेट धोखाधड़ी, गबन और प्रमोटरों द्वारा अनियमितताओं की गहन जांच की जा रही है।
घर खरीदारों की शिकायत बनी अहम कड़ी
ईडी का कहना है कि इस मामले में घर खरीदारों की शिकायतें जांच के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई हैं। आरोप है कि इन कंपनियों ने निवेशकों को ठगकर बड़ी धनराशि अपने व्यक्तिगत लाभ के लिए डायवर्ट की। अब ईडी प्रमोटरों के वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और व्यक्तिगत संपत्तियों की जांच कर रही है।
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आगे की कार्रवाई जारी
प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में प्राप्त दस्तावेजों और अन्य सबूतों की जांच कर रहा है। प्रमोटरों और निदेशकों से पूछताछ जारी है, और जल्द ही और खुलासे होने की उम्मीद है।
यह खबर घर खरीदारों और निवेशकों के लिए राहत भरी हो सकती है, जो लंबे समय से न्याय की उम्मीद कर रहे थे।

