नोएडा। पूर्व के शासन काल में नोएडा प्राधिकरण में अफसरों ने विकास के नाम पर जमकर खेल खेला। वित्तीय अनियमितताओं और अफसरों की लापरवाही ने जनता के अरबों रुपए डूबों दिए। 2010-11 और 2011-12 की स्थानीय लेखा परीक्षा की रिपोर्ट में प्राधिकरण में की गई गड़बड़ियों का खुलासा हुआ। 22 अगस्त को लखनऊ के विधान भवन में ऑडिट आपत्तियों को लेकर बैठक की जाएगी। जिसमें लगाई गई आपत्तियों के जवाब को सुना जाएगा और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी । प्राधिकरण ने इसकी तैयारी की है। इस बैठक में ग्रुप हाउसिंग , प्लानिंग, वाणिज्यिक , स्पोर्ट सिटी , सामान्य प्रशासन से लेकर विकास की परियोजना पर लगाई गई आपत्तियों पर प्राधिकरण की ओर से तैयार किए गए जवाब पर चर्चा होगी।
प्राधिकरण ने बताया कि 2010-11 और 2011-12 में अधिकांश मामले प्लाट आवंटन से संबंधित है। जिसमें कामर्शियल, ग्रुप हाउसिंग , अनुज्ञया या किराए पर आवंटन करने में बड़ी अनियमितता बरती गई। इसके अलावा बड़ी परियोजनाएं जिसमें सेक्टर-21ए में नोएडा क्रिकेट स्टेडियम निर्माण, एमपी-2 पर बनाई गई एलिवेटड, सेक्टर-18 में बनी मल्टीलेवल कार पार्किंग, सेक्टर-30 में बना सरकारी अस्पताल ,चिल्ला रेगुटर एलिवेटड आदि परियोजनाएं है जिनमें स्थानीय लेखा परीक्षा ने आपत्ति लगाई है। इन सभी का जवाब बैठक में दिया जाएगा।
अब समझते हैं कुछ ऐसे मामले में हुई आर्थिक क्षति
-ग्रुप हाउसिंग भू खंड संख्या डी-8ए के साथ संलग्न भूमि 415.40 वर्गमीटर की स्थित स्पष्ट नहीं होने से करीब 3 करोड़ की आर्थिक क्षति।
-ओमेक्स बिल्ड होम प्रलि को आंवटित ग्रुप हाउसिंग भूखंड संख्या 01,02,03 सेक्टर-93बी में अनियमित रूप से संविधान बदलकर सबलीज की अनुमति और डिफाल्टेड किस्तों में रिशिड्यूलमेंट में ब्याज की धनराशि सम्मलित न करने के कारण 98 लाख की आर्थिक क्षति
-आवासीय योजनाओं में निर्मित भ्ज्ञवनों की लागत सब्सीडी के नाम पर 57 करोड़ की धनराशि घटाने से प्राधिकरण को आर्थिक छति।
-बिना शासन के अनुमति के ही उप्र पॉवर कारपोरेशन के कार्य किए जाने से पर हुए व्यय की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
-डॉक्टर भीम राव अंबेडकर अस्पताल सेक्टर-30 में निर्माण के लिए अप्रस्तावित रूप से 322.80 करोड़ की बढ़ोतरी।
लोकल ऑडिट रिपोर्ट में 2012-16 में 900 करोड़ की अनियमितता
वित्तीय वर्ष 2012 से 2016 तक नोएडा प्राधिकरण में करीब 900 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितता सामने आई थी । स्थानीय निधि लेखा परीक्षा (लोकल ऑडिट) के परीक्षण ने अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है। ये ऑडिट 2018-19 के दौरान कराए गया। इसमें प्राधिकरण की ओर से बिल्डरों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए विकास शुल्क की गणना करने, भूति आवंटन और विकास परियोजनाओं में गड़बड़ी की गई।स्थानीय निधि लेखा परीक्षा ने भी नोएडा प्राधिकरण के चार साल के फाइलों की जांच की। जिसमें करीब 900 करोड़ रुपए बड़ी गड़बड़ी सामने आई।

