Noida News: सुप्रीम कोर्ट ने गेझा, तिलपताबाद और अन्य गांवों के अपात्र किसानों को मुआवजा देने में अनियमितताओं की जांच पर असंतोष जताया है। मौजूदा विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट में केवल दो याचिकाकर्ताओं की भूमिका की जांच की गई है, जबकि अन्य अधिकारियों की संलिप्तता की अनदेखी की गई है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को नई एसआईटी गठित करने का आदेश दिया है और इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया है।
पूर्व हाईकोर्ट जज और कई आईपीएस अधिकारी करेंगे जांच
नई एसआईटी हाईकोर्ट के पूर्व जज की निगरानी में जांच करेगी। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा एसआईटी रिपोर्ट में केवल दो अधिकारियों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है, जबकि मुआवजा वितरण में भ्रष्टाचार और दुरुपयोग के संकेत व्यापक हो सकते हैं। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से निर्देश प्राप्त करने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा, जिसे मंजूर कर लिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नई एसआईटी में उत्तर प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रैंक के तीन आईपीएस अधिकारी शामिल होने चाहिए।
मामले पर बहस
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा अथॉरिटी के कानूनी सलाहकार वीरेंद्र नागर और दिनेश सिंह को भी अग्रिम जमानत देने का आदेश दिया। इन अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी थी। एसआईटी जांच में पाया गया कि नोएडा अथॉरिटी ने बिना किसी कानूनी बाध्यता के किसानों को बढ़ी हुई दरों पर मुआवजा दिया। अनियमित और अपात्र किसानों को 297 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से मुआवजा दिया गया।
117 करोड़ 56 लाख 95 हजार रुपये का घोटाला
कोर्ट ने 14 सितंबर 2023 को नोएडा विकास प्राधिकरण और राज्य सरकार को पहले ही निर्देश दिया था कि अनियमितता केवल कानूनी अधिकारियों के स्तर पर नहीं हो सकती और इसकी गहन जांच की जानी चाहिए। एसआईटी ने गेझा, तिलपताबाद और भूड़ा गांवों में 20 मामलों की जांच की, जिसमें 117 करोड़ 56 लाख 95 हजार रुपये के मुआवजे के वितरण में अनियमितताएं उजागर हुईं। इस जांच में पिछले 15 सालों की फाइलों की समीक्षा की गई, जिसमें 1 अप्रैल 2009 से 2023 तक के मामले शामिल थे।

