नोएडा वित्तीय वर्ष 2012 से 2016 तक नोएडा प्राधिकरण में करीब 900 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितता सामने आई। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा (लोकल ऑडिट) के परीक्षण ने अपनी रिपोर्ट में इसका जिक्र किया है। ये ऑडिट 2018-19 के दौरान कराए गया।
बता दें 2017 में सत्ता बदलने के बाद शासन ने नोएडा प्राधिकरण में व्याप्त वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए सीएजी को कहा था। उन्होंने करीब एक साल तक प्राधिकरण में जांच की और 400 पेज की एक रिपोर्ट तैयार की। जिसमें 30 हजार करोड़ रुपए के वित्तीय अनिमितता की बात सामने आई थी। हालांकि जांच रिपोर्ट शासन को सौंपने के बाद भी इस पर एक्शन नहीं लिया गया। इनमें से कई फाइलों के जवाब का इंतजार अब भी है। इसके बाद 2018-19 में ही स्थानीय निधि लेखा परीक्षा ने भी नोएडा प्राधिकरण के चार साल के फाइलों की जांच की। जिसमें करीब 900 करोड़ रुपए बड़ी गड़बड़ी सामने आई। ये रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जा चुकी गई। इसी रिपोर्ट को लेकर लखनऊ में 19 सितंबर को बैठक होगी। जिसमें आपत्तियों का जवाब दिया जाएगा।
लखनऊ जायेंगे नोएडा प्राधिकारण अधिकारी
बैठक में हिस्सा लेने के लिए नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी लखनऊ जाएंगे। प्रमुख सचिव नोएडा प्राधिकरण की तरफ से तैयार किए गए जवाबों की समीक्षा करेंगे। स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग की रिपोर्ट जुलाई में विधानसभा में रखी गई थी। इसी दिन स्पोर्ट्स सिटी मामले में भी लोक लेखा समिति बैठक करेगी। स्पोर्ट्स सिटी से जुड़ी पिछली बैठक में लोक लेखा समिति ने पूरे तथ्यों के साथ प्राधिकरण से जवाब मांगा था।
49 में से कुछ आपत्ति जिनका प्रमुखता से देना होगा जवाब
प्राधिकरण अधिकारियों ने बताया कि स्थानीय निधि लेखा परीक्षा ने, जो मुख्य आपत्तियां, उन मामलों में लगाई हैं, जिनका बजट बढ़ा दिया गया या जमीन अधिग्रहण पूरा किए बिना ही किसी योजना पर काम शुरू किया। जमीन पूरी नहीं मिलने के कारण काम को बीच में बंद करना पड़ा। उदाहरण के तौर पर सेक्टर-153 में जमीन अधिग्रहण का मामला है। सेक्टर-153 में जमीन अधिग्रहण को बीच में अधूरा छोड़ देने से ड्रेन निर्माण पर नौ करोड़ 23 लाख 77 हजार रुपये फंस गए।

