Noida: नोएडा के थाना सेक्टर-39 क्षेत्र में एक दलित परिवार पर दबंगों ने लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। घटना की वजह परिवार की दो बेटियों के साथ हुई छेड़खानी का विरोध बताया जा रहा है। आरोपियों ने परिवार पर जातिसूचक गालियां दीं और धमकी दी कि बेटियों का हाल फिल्म ‘दामिनी’ की तरह कर देंगे। पीड़ित परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, लेकिन थाना प्रभारी को इस घटना की जानकारी ही नहीं है, जो कि पुलिस की लापरवाही को दर्शाता है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायत के अनुसार, पीड़ित महिला अपने परिवार के साथ नोएडा के सलारपुर खादर के जाटव मोहल्ले में रहती हैं। 20 अगस्त को उनकी 16 वर्षीय बेटी घर के गेट पर चारपाई झाड़ रही थी, तभी मुकेश पुत्र गंगावासी वहां आ पहुंचा और उसके साथ छेड़खानी करने लगा। बेटी के विरोध करने पर मुकेश ने गालियां देते हुए धमकी दी और वहां से चला गया।
जब महिला ने अपने पति को इस घटना के बारे में बताया, तो आरोपी मुकेश अपने पिता गंगावासी और भाई सुभाष के साथ मिलकर परिवार पर हमला करने पहुंच गया। आरोप है कि इन लोगों ने परिवार को लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से पीटा। परिवार ने किसी तरह घर का दरवाजा बंद कर अपनी जान बचाई। हमले के दौरान आरोपियों ने जातिसूचक गालियां दीं और धमकी दी कि बेटियों के साथ फिल्म ‘दामिनी’ जैसा हाल करेंगे।
बेटियों का घर से निकलना हुआ मुश्किल
हमले के बाद परिवार की दोनों बेटियां घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रही हैं। पीड़िता का कहना है कि मुकेश और सुभाष उनकी बेटियों पर बुरी नजर रखते हैं और वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। पीड़िता ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, लेकिन पुलिस की उदासीनता ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
पुलिस का लापरवाह रवैया
इस गंभीर मामले के बावजूद, जब मीडिया ने थाना सेक्टर-39 प्रभारी से बात की, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, “मैं देखकर बता पाऊंगा कि यह पूरी घटना क्या है।” पुलिस अधिकारी का यह बयान उनकी लापरवाही और उदासीनता को दर्शाता है, जिससे पीड़ित परिवार को इंसाफ मिलने में कठिनाई हो रही है।
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न्याय की मांग
पीड़ित परिवार ने इस घटना के बाद से ही अपनी बेटियों को घर से बाहर निकलने से रोक दिया है और वे लगातार डरे हुए हैं। परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। थाना प्रभारी की अनभिज्ञता इस बात का संकेत देती है कि पुलिस प्रशासन को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेने की जरूरत है ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

