Noida: नोएडा के ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी में दो साल पहले घटित श्रीकांत त्यागी प्रकरण में कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। न्यायालय ने इस मामले में आरोपी दस युवकों के खिलाफ चल रहे केस को समाप्त करने का आदेश दिया है। यह निर्णय तब आया जब वादी को न्यायालय की ओर से कई बार समन भेजे गए, लेकिन उसकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
क्या था पूरा मामला?
यह प्रकरण अगस्त 2022 में उस समय चर्चा में आया जब ग्रैंड ओमेक्स सोसाइटी में रहने वाले श्रीकांत त्यागी, जो कथित तौर पर भाजपा नेता बताए जाते हैं, पर एक महिला के साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज का आरोप लगा था। इस घटना ने सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में काफी तूल पकड़ा था। महिला के आरोपों के बाद त्यागी को जनता और प्रशासन की कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था।
इसके कुछ दिन बाद, श्रीकांत त्यागी के समर्थन में दस युवक स्कॉर्पियो और फॉर्च्यूनर गाड़ियों में सवार होकर सोसाइटी पहुंचे थे। इन युवकों पर आरोप था कि उन्होंने बिना अनुमति के सोसाइटी में प्रवेश किया और विरोध करने पर वहां के सुरक्षा गार्ड के साथ मारपीट की। इस घटना के बाद सोसाइटी में तनावपूर्ण माहौल बन गया था, और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
गिरफ्तार हुए थे कई युवक
इस मामले में पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नितिन त्यागी, लोकेंद्र त्यागी, राहुल त्यागी, चर्चिल राणा, प्रिंस त्यागी और रवि पंडित को गिरफ्तार किया था। इन सभी पर सोसाइटी में जबरन घुसने और मारपीट करने के आरोप लगे थे। हालांकि, बाद में सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
कोर्ट ने किया केस समाप्त
हाल ही में इस प्रकरण पर अदालत ने सुनवाई की, जिसमें वादी की ओर से लगातार अनुपस्थिति के चलते कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ मामला खत्म करने का आदेश दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद नितिन त्यागी, लोकेंद्र त्यागी, राहुल त्यागी, चर्चिल राणा और प्रिंस त्यागी सहित सभी युवकों पर से यह मामला समाप्त हो गया है।
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न्यायिक प्रक्रिया पर उठे सवाल
अदालत का यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया और कानून व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है। पीड़ित पक्ष द्वारा न्यायालय के समनों का जवाब न देने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का खत्म होना, न्याय व्यवस्था की कमजोरी की ओर संकेत करता है। क्या इस प्रकरण में आरोपियों को सही तरीके से न्यायिक प्रक्रिया का सामना करने का मौका मिला, या फिर न्याय व्यवस्था की धीमी गति ने इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया?

