Lucknow News : लखनऊ के काकोरी ब्लॉक स्थित दसदोई ग्राम सभा के प्रधान राजकुमार यादव पर गंभीर आरोप लगे हैं। प्रधान ने सरकारी योजनाओं का लाभ अपने परिवार के सदस्यों को पहुंचाने के लिए एक बड़ा खेल रचाया। चार बेटों और बेटियों के नाम पर सरकारी जॉब कार्ड बनवाकर मनरेगा की रकम, गौशाला के मानदेय और ग्राम निधि का पैसा अपने परिवार के खातों में ट्रांसफर किया। इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब ग्राम पंचायत सचिव और बीडीओ भानु प्रताप सिंह ने जांच शुरू की। बीडीओ की जांच रिपोर्ट में भ्रष्टाचार के कई मामलों का खुलासा हुआ है, और अब इस मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं।
मनरेगा जॉब कार्ड का धोखाधड़ी से इस्तेमाल
प्रधान राजकुमार यादव ने अपने चार बच्चों के नाम पर मनरेगा के जॉब कार्ड बनवाए थे। इसमें उनके तीन बेटों – नागेन्द्र, बालेन्द्र, और शैलेन्द्र के अलावा बेटी के नाम पर भी जॉब कार्ड जारी किए गए थे। हालांकि, नियमों के अनुसार प्रधान अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम पर जॉब कार्ड नहीं बना सकता। इन जॉब कार्ड के माध्यम से प्रधान ने मनरेगा की मजदूरी अपने बच्चों के बैंक खातों में ट्रांसफर करवा दी। बीडीओ की जांच में यह साबित हुआ कि इन खातों में सरकारी राशि भेजी गई थी, जो पूरी तरह से नियमों के खिलाफ था।
गौशाला का दोहरा लाभ
गांव (Lucknow News) में बने सरकारी गौशाला के लिए दो गौपालक नियुक्त किए जाने थे। प्रधान ने अपने दोनों बेटों को ही गौपालक बना दिया, जो पहले ही मनरेगा के जॉब कार्ड के तहत मजदूरी प्राप्त कर रहे थे। इसके परिणामस्वरूप, प्रधान के बेटों को दोहरा लाभ मिला – एक ओर मनरेगा का पैसा और दूसरी ओर गौपालक का मानदेय। बीडीओ की रिपोर्ट में इस बात की भी पुष्टि हुई है। हालांकि, जांच के बाद प्रधान के दोनों बेटों को गौपालक के पद से हटा दिया गया है।
ग्राम निधि का पैसा भी हुआ गबन
प्रधान राजकुमार यादव ने ग्राम विकास निधि का पैसा भी अपने पुत्रों के बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिया। बीडीओ की रिपोर्ट में इस गबन की भी पुष्टि हुई है, और अब यह जांच की जा रही है कि कितना पैसा ट्रांसफर किया गया। यह मामला भी भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है, और अधिकारियों ने इसकी गंभीरता से जांच शुरू कर दी है।
आगे की कार्रवाई
बीडीओ भानु प्रताप सिंह ने 30 पेज की रिपोर्ट तैयार की और उसे उपायुक्त मनरेगा को भेज दिया। रिपोर्ट में प्रधान के भ्रष्टाचार की स्पष्ट रूप से जानकारी दी गई है। इसके बाद मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) ने इस मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं, और जल्द ही प्रधान और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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