Delhi High Court ने बुधवार को यमुना नदी के किनारे और डूब क्षेत्र में अवैध रूप से बनाए गए शिव मंदिर को गिराने की अनुमति दे दी। उच्च न्यायालय ने कहा कि भगवान शिव को हमारी सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है और यदि यमुना नदी के किनारे और बाढ़ के मैदानों को सभी अतिक्रमणों और अनधिकृत निर्माण से मुक्त कर दिया जाए तो वे अधिक खुश होंगे।न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा ने बुधवार को प्राचीन शिव मंदिर एवं अखाड़ा समिति की याचिका खारिज कर दी, जिसमें गीता कॉलोनी में ताज एन्क्लेव के पास स्थित प्राचीन शिव मंदिर को गिराने के आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी।
मामले को लेकर Delhi High Court ने क्या कहा ?
न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा ने 29 मई को पारित फैसले में कहा, भगवान शिव को हमारी सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है,बल्कि हम लोग उनकी सुरक्षा और आशीर्वाद चाहते हैं। पीठ ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यदि यमुना नदी के किनारे और डूब क्षेत्र को सभी अतिक्रमणों और अनधिकृत निर्माण से मुक्त कर दिया जाए तो भगवान शिव अधिक प्रसन्न होंगे। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, याचिकाकर्ता के विद्वान वकील द्वारा यह आधे-अधूरे मन से दिया गया तर्क कि मंदिर के देवता होने के नाते भगवान शिव को भी इस मामले में पक्षकार बनाया जाना चाहिए, अपने सदस्यों के निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए पूरे विवाद को एक अलग रंग देने का एक हताश प्रयास है।
मूर्तियों और धार्मिक वस्तुओं को हटाने के लिए 15 दिन का समय
Delhi High Court की पीठ ने कहा, केवल इस तथ्य से कि मंदिर में प्रतिदिन प्रार्थना की जाती है और कुछ विशेष उत्सवों के अवसर पर विशेष आयोजन होते हैं, संबंधित मंदिर को सार्वजनिक महत्व का स्थान नहीं बना दिया जाता।”पीठ ने कहा, उपर्युक्त चर्चा के मद्देनजर वर्तमान रिट याचिका खारिज की जाती है। हालांकि, उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता सोसायटी को मंदिर में स्थित मूर्तियों और अन्य धार्मिक वस्तुओं को हटाने तथा उन्हें किसी अन्य मंदिर में रखने के लिए 15 दिन का समय दिया।
डीडीए को अनधिकृत निर्माण को ध्वस्त करने की स्वतंत्रता
पीठ ने कहा यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो प्रतिवादी डीडीए को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि मूर्तियों को किसी अन्य मंदिर में रखा जाए, या यदि धार्मिक समिति से किसी सुझाव के लिए संपर्क किया जाता है, तो वे निर्देश दें। जिसके बाद डीडीए को अनधिकृत निर्माण को ध्वस्त करने की स्वतंत्रता होगी, तथा याचिकाकर्ता सोसायटी और उसके सदस्य ऐसी ध्वस्तीकरण प्रक्रिया में कोई बाधा या रुकावट पैदा नहीं करेंगे। Delhi High Court ने निर्देश दिया कि स्थानीय पुलिस और प्रशासन कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए उक्त प्रक्रिया में पूरी सहायता प्रदान करेंगे।

