India Pakistan Ceasefire: भारत द्वारा चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तीव्र और सटीक सैन्य कार्रवाई से दबाव में आया पाकिस्तान आखिरकार झुक गया। भारत के जवाबी हमलों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ने के बाद पाकिस्तान ने युद्धविराम के लिए दुनिया भर के देशों से मध्यस्थता की अपील की। इसी कूटनीतिक घटनाक्रम के बीच शनिवार देर रात एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच तत्काल प्रभाव से पूर्ण युद्धविराम की घोषणा की।
ट्रंप की बड़ी घोषणा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “संयुक्त राज्य अमेरिका की मध्यस्थता में एक लंबी रात की बातचीत के बाद मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि भारत और पाकिस्तान पूर्ण और तत्काल युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं। दोनों देशों को बधाई।”
भारत सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने ट्रंप की इस घोषणा की पुष्टि करते हुए बताया कि यह निर्णय कई दौर की गहन कूटनीतिक चर्चाओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद संभव हुआ।
पकिस्तान की आतंकी हमलों पर चुप्पी
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी इस बात की पुष्टि की है कि भारत और पाकिस्तान ने युद्धविराम पर सहमति जताई है। उन्होंने पूर्व में ट्विटर कहे जाने वाले प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा —
“पाकिस्तान ने हमेशा अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता किए बिना क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए प्रयास किया है।”
हालांकि उन्होंने हाल ही में भारत पर किए गए नाकाम आतंकी हमलों के लिए न कोई खेद जताया और न ही माफी मांगी। इसके बजाय उन्होंने अपनी बातों में पाकिस्तान की ‘शांति की मंशा’ को दोहराया और हमलों को जायज़ ठहराने की कोशिश की।
ऑपरेशन सिंदूर बना निर्णायक मोड़
भारतीय सेना द्वारा संचालित ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने पाकिस्तान पर रणनीतिक, सैन्य और मनोवैज्ञानिक रूप से जबरदस्त दबाव बनाया। भारतीय वायुसेना और थलसेना ने सीमाओं के पार मौजूद आतंकी लॉन्चपैड्स और पाकिस्तानी सेना के सैन्य ठिकानों पर लक्षित हमले किए। रफीकी, मुरीद, रहीम यार खान जैसे संवेदनशील सैन्य अड्डों पर सटीक हथियारों से कार्रवाई की गई।
इन हमलों के परिणामस्वरूप पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जवाब देना मुश्किल हो गया और उसे अंततः अमेरिका से मदद मांगनी पड़ी।
सीजफायर की घोषणा
सीजफायर की घोषणा भले ही एक सकारात्मक कूटनीतिक पहल के रूप में देखी जा रही है, लेकिन भारत की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि भविष्य में फिर से आतंकवाद का सहारा लिया गया, तो उसे सीधे युद्ध की कार्रवाई समझा जाएगा और उसी अंदाज़ में जवाब भी दिया जाएगा।
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