Greater Noida: ग्रेटर नोएडा में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एसडीएम सदर कार्यालय के एक कर्मचारी पर भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगा है। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अनुसार, उक्त कर्मचारी ने जमीन की पैमाइश के बदले में एक किसान से दस किलो घी और दो लाख रुपये की अवैध मांग की। यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है और किसानों के अधिकारों के हनन की ओर इशारा करती है।
वकीलों का आक्रोश, कलमबंद हड़ताल का ऐलान
इस घटना के बाद स्थानीय वकील समुदाय में आक्रोश फैल गया है। विरोध स्वरूप, डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने कलमबंद हड़ताल की घोषणा की है और डीएम कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल भाटी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद किसानों के मामलों का समय पर निपटारा नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा, “किसानों के हक का हनन करना अब बर्दाश्त से बाहर हो गया है, और इसे लेकर वकीलों ने मोर्चा खोल दिया है।”
वारिसान प्रमाण पत्र के नाम पर अवैध वसूली
बार एसोसिएशन के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि एसडीएम कार्यालय में वारिसान प्रमाण पत्र बनाने के नाम पर भी अवैध वसूली की जा रही है। वकीलों का कहना है कि इस तरह के भ्रष्टाचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे किसानों और अन्य आम जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वकीलों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके।
एसडीएम सदर ने आरोपों को किया खारिज
हालांकि, एसडीएम सदर चारुल यादव ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि सभी वाद नियमानुसार दर्ज किए जाते हैं और किसी भी प्रकार की अवैध वसूली की बात निराधार है। वहीं, डीएम मनीष कुमार वर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा है कि जल्द ही जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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पुराने मामले की याद दिलाती घटना
यह घटना हाल ही में हापुड़ में सामने आए एक समान मामले की याद दिलाती है, जहां एक सरकारी कर्मचारी ने मुकदमा दर्ज करने के लिए मिठाई की मांग की थी। ऐसे भ्रष्टाचार के मामलों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका समाधान जरूरी है।

