Greater Noida: ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर-50 स्थित एटीएस ली ग्रांडियोस सोसायटी में 18 फरवरी को सीवर सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आए राजू की उपचार के दौरान मौत हो गई। उनका इलाज यथार्थ अस्पताल में चल रहा था, जहां वह आईसीयू में वेंटिलेटर पर थे। चिकित्सकों की टीम लगातार उन्हें होश में लाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन पांच दिन बाद उन्होंने दम तोड़ दिया।
परिवार में छाया मातम, शव ले गए पैतृक गांव
मृतक राजू के भाई डब्बू ने उनकी मृत्यु की पुष्टि की। इसके बाद पीड़ित स्वजन शव को लेकर हाथरस के सिकंदराराऊ स्थित अपने पैतृक गांव रवाना हो गए, जहां अंतिम संस्कार कर दिया गया।
घटना का पूरा विवरण
राजू अपने 35 वर्षीय भाई बबलू के साथ सोसायटी के सीवर की सफाई के लिए उतरे थे। जहरीली गैस के संपर्क में आने से दोनों बेहोश हो गए थे। सोसायटी के मेंटेनेंस प्रबंधन ने उन्हें उपचार के लिए यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां डॉक्टरों ने बबलू को मृत घोषित कर दिया था। वहीं, राजू जीवन और मौत के बीच संघर्ष करते हुए पांच दिन बाद चल बसे।
सोसायटी प्रबंधन ने दिया आर्थिक मदद का आश्वासन
अब तक पीड़ित परिवार ने सोसायटी प्रबंधन के खिलाफ कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई है। हालांकि, सोसायटी प्रबंधन ने मृतकों के परिवार को आर्थिक सहायता और भरण-पोषण की मदद का आश्वासन दिया है। डब्बू ने बताया कि अभी परिवार शोक में है और कुछ दिनों बाद वे ग्रेटर नोएडा आकर आगे की कार्रवाई पर विचार करेंगे।ॉ
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पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
सीवर सफाई के दौरान जहरीली गैस से दम घुटने के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन सुरक्षा मानकों की अनदेखी अब भी जारी है।
- केस 1: 17 मई 2024 को फेस-2 कोतवाली क्षेत्र के होजरी कांप्लेक्स में रेडीमेड गारमेंट कंपनी के सीवर की सफाई करने उतरे दो सफाईकर्मियों की दम घुटने से मौत हो गई थी।
- केस 2: 4 मई 2024 को थाना सेक्टर-20 में एक मकान के सीवर की सफाई के दौरान दो मजदूर जहरीली गैस की चपेट में आकर मौत के शिकार हो गए थे।
- केस 3: 25 जून 2024 को ईकोटेक-1 कोतवाली क्षेत्र स्थित कोफोर्ज कंपनी के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में सफाई के दौरान तीन कर्मचारियों की मौत हो गई थी।
सवाल उठ रहे हैं, लेकिन समाधान नहीं
बार-बार होने वाले इन हादसों के बावजूद सफाई कर्मचारियों को बिना उचित सुरक्षा उपकरणों के सीवर में उतारा जाता है। इन घटनाओं से सबक लेने के बजाय जिम्मेदार प्रशासन और संबंधित प्रबंधन आंखें मूंदे बैठे हैं। जब तक सुरक्षा मानकों को लेकर सख्त कदम नहीं उठाए जाते, ऐसे हादसे जारी रहने की आशंका बनी रहेगी।

