Greater Noida: गुरुवार को यमुना एक्सप्रेसवे पर ईंटों से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली से एक और हादसा हुआ। पिछले सात दिनों में यह दूसरी ऐसी घटना है। 24 मई 2024 को तेज रफ्तार कार ईंटों से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई थी, जिसमें दिल्ली की रहने वाली मां-बेटी घायल हो गई थीं। आज यानी गुरुवार 30 मई 2024 को भी इसी तरह के ट्रैक्टर-ट्रॉली से एक और हादसा हुआ। इस बार ट्रैक्टर-ट्रॉली और बस में टक्कर हो गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर रबूपुरा थाने की टीम मौके पर पहुंची। गुरुवार को हुए हादसे में ट्रैक्टर और बस के चालक दोनों घायल हो गए। तीन बड़े सवाल जिनके जवाब चाहिए:
- यमुना एक्सप्रेसवे पर ऐसे वाहन क्यों चल रहे हैं?
सबसे पहला सवाल यह उठता है कि 10,000 ईंटों से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली यमुना एक्सप्रेसवे पर क्यों चलाई जा रही है। यह सर्वविदित है कि इन ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के कारण एक्सप्रेसवे पर कई दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें कई लोगों की मौत भी हुई है। बेहतर प्रबंधन के दावों के बावजूद ये ओवरलोड वाहन खुलेआम चल रहे हैं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? अक्सर देखा गया है कि इन ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट भी नहीं होती।
- कृषि वाहनों का व्यावसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है?
दूसरा सवाल यह है कि कृषि उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले ट्रैक्टरों का व्यावसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है। ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? यह घटना विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों पर सवाल उठाती है।
- ओवरलोडिंग के कारण पहिए सड़क से उतर जाते हैं:
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण सवाल इन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की खतरनाक ड्राइविंग स्थितियों के बारे में है। इनमें इतना अधिक लोड होता है कि कई बार ट्रैक्टर के अगले पहिए जमीन से ऊपर उठ जाते हैं। सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद ये खतरनाक वाहन कैसे चल रहे हैं? क्या पुलिस इन पर ध्यान नहीं देती? यह एक गंभीर मुद्दा है।
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गौतमबुद्धनगर ट्रैफिक डीसीपी अनिल कुमार यादव का बयान
गौतमबुद्धनगर ट्रैफिक पुलिस डीसीपी अनिल कुमार यादव ने बताया, “हम ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं। इसके लिए ट्रैफिक इंस्पेक्टरों का एक ग्रुप बनाया गया है। इन ग्रुपों को मिलने वाली तस्वीरों के आधार पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास ट्रैफिक पुलिस मौजूद रहती है। ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के अलावा ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले अन्य वाहनों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाती है। साथ ही, इन ओवरलोड वाहनों के बारे में आरटीओ को भी सूचित किया जाता है, क्योंकि इनके खिलाफ उचित कार्रवाई करने की जिम्मेदारी विभाग की होती है। पुलिस संबंधित अधिकारी और जिम्मेदार जेपी कंपनी को भी सूचित करती है। जब कार्रवाई करने की बात आती है, तो पुलिस पीछे नहीं हटती।”

