Ghaziabad: गाजियाबाद मेंराज्य सूचना आयुक्त वीरेंद्र प्रताप सिंह ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) धर्मवीर शर्मा के खिलाफ सूचना अधिकार अधिनियम-2005 की अनदेखी करने पर कड़ी कार्रवाई की है। डीआईओएस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है और साथ ही संबंधित सूचना को तत्काल उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो सूचना आयोग विभागीय कार्यवाही की संस्तुति करेगा।
क्या है मामला
23 जुलाई, 2022 को देशपाल सिंह ने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत डीआईओएस गाजियाबाद से जैन मति उजागरमल जैन इंटर कॉलेज कविनगर में अध्यापकों की नियुक्ति और मान्यता के संबंध में सूचना मांगी थी। लेकिन निर्धारित समय में सूचना न मिलने पर उन्होंने अपील की। प्रथम अपील में भी कोई समाधान न मिलने पर देशपाल सिंह ने राज्य सूचना आयोग का रुख किया। आयोग ने 25 जून, 2024 को डीआईओएस को अंतिम अवसर देते हुए 15 दिन के भीतर वांछित सूचना उपलब्ध कराने का आदेश दिया था, और साथ ही 25 हजार रुपये के जुर्माने की चेतावनी दी थी, लेकिन डीआईओएस ने इस आदेश की अनदेखी की।
सुनवाई में अनुपस्थिति और जुर्माना
20 सितंबर, 2024 को आयोग ने डीआईओएस को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया, लेकिन वह न तो सुनवाई में उपस्थित हुए और न ही किसी प्रकार का स्पष्टीकरण दिया। इसके बाद 25 नवंबर, 2024 को ईमेल ट्रैकिंग से यह जानकारी मिली कि सूचना अधिकारी को संबंधित सूचना मिल चुकी थी, फिर भी 27 नवंबर, 2024 को वह सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए और न ही नोटिस का कोई जवाब दिया।
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आयोग की कड़ी कार्रवाई
इसके बाद राज्य सूचना आयुक्त ने डीआईओएस धर्मवीर शर्मा पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया और आदेश दिया कि जुर्माना राशि डीआईओएस के वेतन से चार समान किश्तों में वसूली जाएगी। इसके साथ ही रजिस्ट्रार सूचना आयोग, लखनऊ को इस जुर्माने की वसूली कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश भी दिया गया। सूचना आयुक्त ने चेतावनी दी कि यदि 15 दिन के भीतर आवेदक को सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई, तो विभागीय कार्यवाही की संस्तुति की जाएगी।
इस आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि सूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारियों का अधिकार प्राप्त करने वाले नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

