गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में आए दिन फर्जीवाडे के उजागर हो रहे मामलों के बीच माना जा रहा है कि फर्जी वाडे के प्रकरण बढ़ने की बड़ी वजह एक बडी रकम खर्च किए जाने के बावजूद भवन-भूखंड आवंटन से जुडी फाइलों का शत प्रतिशत कम्प्यूटराइजेशन नहीं किया जाना है। यही वजह है कि प्राधिकरण का कुछ स्टाफ इसका लाभ उठा रहा है।
जीडीए ही फर्जीवाड़े की बुनियाद पर खड़ा
जबकि देखा जाए तो फाइलों के कम्प्युटराइजेशन को लेकर समय समय पर कई एजेंसियों का सहारा लिया गया। बाकायदा जीडीए स्टाफ को भी कम्प्यूटर का प्रशिक्षण दिलाया गया। भवन भूखंड आदि के आवंटन से जुडी फाइलों के कम्प्यूटराइजेशन के प्रकरण में देखा जाए तो जिस स्थान से शुरूआत की गई थीं,वही पर जीडीए खड़ा हुआ है।
देखा जाए तो जीडीए के भवन भूखंड आदि के आवंटन से जुडी फाइलों के कम्प्यूटराइजेशन के लिए समय समय पर निजी एजेंसियों का सहारा लिया गया। बाकायदा निजी एजेंसियों के द्वारा इस कडी में अपने स्टाफ को भी लगाया गया।
स्टाफ के आवास से संचालित होती है पैरलल व्यवस्था
जानकार बताते है कि जमीनों आदि के रेट बढने का नतीजा ये है कि स्टाफ के सगे संबंधी प्रोपर्टी डीलर बने हुए है। कुछ स्टाफ के आवास से फर्जी बाडे को अंजाम देने के लिए पैरलल व्यवस्था की गई है। सूत्रों की मानें तो आवास पर ही नए सिरे से फाइल तैयार कर की जाती है।

