मशहूर शायर मुन्नवर राना (Munawar Rana) का रविवार रात इंतकाल हो गया उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में मुन्नवर राना का इंतकाल हुआ लंबे समय से वे बीमार चल रहे थे।
अब आपको बताते हैं मुन्नवर राना का सफर-ए-शायरी
मुन्नवर राना (Munawar Rana) ने अपनी जिंदगी का सफर मीर आकर लौट गया में लिखा अपनी शायरी के शुरूआती दिनों के बारे में उन्होनें आत्मकथा लिखी इस पूरी किताब में मुनव्वर राना एक ऐसे शख़्स के रूप में नज़र आते हैं जो मुसलसल वक्त की ऊँची-नीची पगडण्डियों से गुज़रते चले जा रहे हैं। इस दौरान आगे बढ़ने के लिए कभी वे जमाने की अँगुली थाम लेते हैं और कभी ख़ुद जमाने को सहारा देकर आगे बढ़ाते हैं। इस पूरे सफ़र में कभी थकान और मायूसियाँ हैं तो कभी हँसी-खुशी के पल और तरोताजा करने वाले हवा के झोंके भी हैं।
‘मीर आकर लौट गया’ किताब में मुन्नवर राना ने अपनी जिंदगी के बारे लिखे कई पहलू
मुन्नवर राना (Munawar Rana) मां की कविताओं को लेकर काफी जाने जाते रहे क्योंकि वो अपनी मां से बेहद ही प्यार करते थे लेकिन मुन्नवर राना ने ‘मीर आकर लौट गया’ अपनी किताब में अपने पिता से भी वो कितना प्यार करते थे उसके बारे में भी लिखा और एक किस्से का जिक्र किया जब उन्होंने अपने पिता को Tata Safari खरीद के दी थी और सिर्फ अब्बू एक बार उस गाड़ी में बैठ पाए और उसके ठीक अगले ही हफ्ते अम्मी ने चूड़िया तोड़ दी उसके बाद मुन्नवर राना ने कभी टाटा सफारी की तरफ निगाहें नहीं की।
मां पर मुन्नवर राना की कई भावुक कर देने वाले शायर जो हमेशा याद रहेंगे चलती फिरती हुई आंखो से अजां देखी है, मैनें जन्नत तो नहीं देखी पर मां देखी है। भाई-बहन के पवित्र रिश्ते पर मुन्नवर राना की ये शायरी- किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा,अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा।
शायरी के साथ साथ मुन्नवर राना विवादों में भी रहे जानें
शायरी के साथ साथ मुन्नवर राना (Munawar Rana) विवादों में भी रहे साल 2022 में यूपी में हुए विधानसभा चुनाव से पहले मुन्नवर राना ने कहा था कि अगर योगी आदित्यनाथ अगर दोबारा सीएम बने तो यूपी छोड़कर दिल्ली कोलकाता चला जाउंगा प्रधानमंत्री मोदी ने योगी के कंधे पर हाथ रखकर उत्तर प्रदेश में भेदभाव फैलाकर ही बुरा कर दिया केवल नारा दिया गया सबका साथ सबका विकास लेकिन मुसलमानों को प्रदेश छुड़वाने को मजबूर किया। साल 2015 में यूपी स्थित नोएडा के दादरी में अखलाक की मॉब लिंचिंग में हत्या के बाद उन्होंने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटा दिया था।

