आज भारत में महाशिवरात्रि का त्योहार बड़ी ही आस्था के साथ मनाया जा रहा है लोग सुबह से ही शिव जो की आराधना करने के लिए मंदिरों में पहुंच रहें हैं। मंदिरों में सुबह से ही भीड़ लगनी चालू हो चुकी है,लेकिन शिव जी की आराधना करते हुए इन कार्यों को बिल्कुल नहीं करना चाहिए इससे शिवजी की कृपा आप पर नहीं बन पाएगी तो आइए आपको बताते है कि वो कौन से कार्य हैं जिन्हें नहीं करना चाहिए-
शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय लोहे या स्टील के बर्तन का उपयोग न करें। इसके बदले आप पीतल, चांदी का प्रयोग करें। भगवान शिव के अभिषेक में भूलकर भी भैंस के दूध का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। शंकर भगवान की पूजा में हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है। भोलेनाथ को कनेर और कमल के अलावा कोई भी अन्य फूल प्रिय नहीं हैं।
शिव जी को किसी भी लाल रंग के फूल, केतकी और केवड़े के फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से पूजा का फल नहीं मिलता है। शास्त्रों के अनुसार शिव जी की पूजा में कुमकुम और रोली का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसलिए शिवलिंग पर कभी भी रोली नहीं चढ़ानी चाहिए।
आमतौर पर सभी देवी-देवताओं की पूरी परिक्रमा की जाती है, लेकिन शिवलिंग की आधी परिक्रमा करने का विधान है, हालांकि शिवलिंग की आधी परिक्रमा कर वापस आधी परिक्रमा करनी चाहिए। शिवलिंग की परिक्रमा करते समय दिशा का भी विशेष ध्यान रखें। सभी पूजा में देवी-देवताओं की परिक्रमा दाईं ओर से शुरू होती है, लेकिन शिवलिंग की परिक्रमा बाईं ओर से की जाती है, परिक्रमा करते समय कभी भी जलाधारी को लांघना नहीं चाहिए। इसे बहुत अशुभ माना जाता है। इससे शारीरिक ऊर्जा की हानि होती है।
महाशिवरात्रि के दिन भोले भंडारी को गुड़ से बना पुआ भोग लगाएं. भोलेनाथ को महाशिव रात्रि के दिन हलवा भोग लगाने का भी खास महत्व है। साथ ही इस शिवजी को कच्चे चने का भी भोग लगाया जाता है. भोलेनाथ को मखाने की खीर का भी भोग आप लगा सकते है। शिवरात्रि के दिन पर लस्सी का भी भोग शिव जी को लगा सकते हैं।
अब अगर बात की जाए आज महाशिवरात्रि पर शिव जी की आराधना करने का शुभ मुर्हूत तो इस समय भोलेनाथ की आराधना करने से कृपा बरसेगी-
निशिता काल पूजा समय – 18 फरवरी, रात 11 बजकर 52 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक
रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 18 फरवरी, शाम 6 बजकर 40 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 46 मिनट तक
रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय -रात 09 बजकर 46 मिनट से रात 12 बजकर 52 मिनट तक
रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 19 फरवरी, रात 12 बजकर 52 मिनट से 03 बजकर मिनट तक
रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 19 फरवरी, 03 बजकर 59 मिनट से सुबह 07 बजकर 05 मिनट तक

