नोएडा। मांगों को लेकर किसान करीब 70 दिनों से प्राधिकरण के बाहर प्रदर्शन कर रहे है। पिछले साल भी किसानों ने 122 दिन प्रदर्शन किया। उस समय विधायक पंकज सिंह ने किसानों को आश्वस्त किया था कि “सही रुकेगा नहीं, गलत को होने नहीं दिया जायेगा ” इसके बाद किसानों ने प्रदर्शन खत्म कर दिया था। किसानों की करीब 28 बार प्राधिकरण में वार्ता हुई। किसानों के प्रतिनिधि मंडल ने चेयरमैन मनोज सिंह से भी मुलाकात की लेकिन मांगों को पूरा नहीं किया गया।
यही वजह रही कि सोमवार को किसानों का आक्रोश बढ़ गया और उन्होंने विधायक का घेराव किया। विधायक पंकज सिंह ने भी खुले तौर पर आईडीसी और औद्योगिक मंत्री को कड़े शब्दो में 15 दिनों का समय दिया औार कहा कि 16वें दिन वे खुद किसानों के साथ प्रदर्शन में उतर आएंगे। इस बयान के बाद से प्राधिकरण में हड़कंप का माहौल है। देर शाम तक किसानों की मांगों को लेकर चर्चा की जाती रही। भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखवीर खलीफा ने बताया कि प्राधिकरण पर धरना समाप्त नहीं किया जाएगा। जब तक हमारी मांगों को पूरा नहीं किया जाता। हर हाल में अपना हक लेकर रहेंगे। यह नोएडा शहर हमारी जमीनों पर बसा है।
किसानों को सिर्फ मिला आश्वासन इसलिए हुए आक्रोशित
2022 में किसानों ने प्राधिकरण के बाहर 122 दिन प्रदर्शन किया। इस दौरान आमरण अनशन तक किया। जिससे दर्जनों किसानों की तबीयत बिगड़ गई। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ा। आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद 28 बार प्राधिकरण के साथ बैठक की गई लेकिन हर बार नतीजा शून्य ही निकला।
जन प्रतिनिधियों ने किसानों को आश्वस्त किया था कि उनकी मांगों को पूरा किया जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। किसानों की आईडीसी के साथ बैठक कराई गई। इस बैठक में भी सिर्फ आश्वासन मिला। प्राधिकरण की 210वीं बोर्ड में किसानों के प्रस्ताव लाने की बात कही गई लेकिन 18 प्रस्तावों में एक भी प्रस्ताव किसानों से संबंधित नहीं लाया गया। इस बीच भारतीय किसान परिषद का कई किसानों ने साथ छोड़ दिया लेकिन सोमवार को आक्रोशित किसानों ने ऐसा प्रदर्शन किया कि विधायक तक को बोलना पड़ा।
अब जानते है विधायक पंकज सिंह ने क्या बोला
“हम जनप्रतिनिधि हर रोज किसानों का धरना-प्रदर्शन झेल रहे हैं और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमिश्नर (IDC) लखनऊ में बैठकर तमाशा देखते हैं।” नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी को फटकारते हुए विधायक ने कहा कि “उनसे कहिए, लखनऊ में बैठकर तमाशा नहीं देखें। मैं 15 दिन का समय दे रहा हूं। यह समय उद्योग मंत्री को भी दे रहा हूं। जल्दी से समस्या का समाधान करें। 16वे दिन मै खुद किसानों के साथ प्रदर्शन में शामिल हो जाउंगा”
किसानों की है यह मांग :-
- 1997 के बाद के सभी किसानों को बढ़ी दर 67.4 प्रतिशत की दर से मुआवजा दिया जाए। चाहे वह कोर्ट गए हो या नहीं।
- किसानों को 10 प्रतिशत विकसित भूखंड दिया जाए। प्राधिकरण कहता आ रहा है कि जमीन के बदले धनराशि दी जा सकती है।
- आबादी जैसी है वैसी छोड़ी जाए। विनियमितीकरण की 450 वर्गमीटर सीमा को बढ़ाकर 1000 प्रति वर्गमीटर किया जाए।
- भूमि उपलब्धता न होने के कारण पात्र किसानों के 5 प्रतिशत आबादी भूखंड भू लेख विभाग में नहीं रोके जाएंगे। उनका नियोजन किया जाए।
- भवनों की ऊंचाई को बढ़ाए जाने की अनुमति दी जाए क्योंकि गांवों के आसपास काफी हाइराइज इमारत है। ऐसे में उनका एरिया लो लेयिंग एरिया में आ गया है।
- 5 प्रतिशत विकसित भूखंड पर व्यावसायिक गतिविधियां चलने की अनुमति दी जाए।
- गांवों के विकास के साथ खेल बजट का प्रावधान किया जाए। गांवों में पुस्तकालय बनाए जाए।
भारतीय किसान परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने क्या कहा
“जब तक सभी किसानों की आबादी का संपूर्ण निदान नहीं होगा, वह लौटेंगे नहीं। तब तक अधिकारियों के साथ यह खींचतान चलती रहेगी। प्राधिकरण यदि चाहता है कि सुचारू रूप से वह कार्यालय में कम करें तो किसानों को प्राथमिकता देनी ही पड़ेगी। यदि प्राधिकरण किसानों को गुमराह व प्रताड़ित करता रहेगा तो आक्रोशित किसान कभी भी प्राधिकरण कार्यालय पर तालाबंदी कर सकते हैं।”
सद्बुद्धि के लिए हर शनिवार को होता है हवन
किसान नोएडा प्राधिकरण के बाहर हर शनिवार को मंत्र उचारण के साथ प्राधिकरण अधिकारियों की सद्बुद्धि के लिए हवन पूजन करते रहे है। यह सिलसिला अब भी जारी रहेगा। किसान नेताओं ने कहा कि प्राधिकरण की जब भी बोर्ड बैठक होती है किसानों से किसी भी प्रकार की रायशुमारी नहीं ली जा रही है। जो मुद्दे बोर्ड बैठक में पास होकर अभी पेंडिंग है, उनको भी पूरा नहीं किया गया। यदि प्राधिकरण ऐसे ही किसानों की अनदेखी करता रहेगा तो पूर्व की भांति किसानों का आक्रोश प्राधिकरण को झेलना पड़ेगा।

