नरेंद्र मोदी ने रविवार को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 71 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली। प्रधानमंत्री मोदी की नई कैबिनेट ने राज्यों की राजनीति पर भी पूरा ध्यान दिया है। देश की सबसे बड़ी पंचायत में सबसे ज्यादा सांसद भेजने वाले उत्तर प्रदेश की मोदी कैबिनेट 3.0 में मजबूत मौजूदगी है। यूपी से दस चेहरों को केंद्रीय मंत्रालय में जगह मिली है, जो अन्य राज्यों के मुकाबले सबसे ज्यादा है।
कैबिनेट में यूपी का दबदबा
मोदी कैबिनेट में उत्तर प्रदेश से राजनाथ सिंह, हरदीप पुरी (यूपी से राज्यसभा सांसद), जयंत चौधरी, जितिन प्रसाद, पंकज चौधरी, अनुप्रिया पटेल, एसपी सिंह बघेल, कीर्ति वर्धन सिंह, बीएल वर्मा और कामेश पासवान को मंत्री पद दिया गया है। उत्तर प्रदेश के बाद बिहार से आठ सांसदों को मंत्री बनाया गया है। बिहार के बाद महाराष्ट्र से छह सांसदों को मंत्री बनाया गया है। वहीं, राजस्थान और मध्य प्रदेश से पांच-पांच सांसदों को मोदी कैबिनेट में जगह मिली है।
जातीय समीकरण पर फोकस
बता दें कि पीएम मोदी की नई कैबिनेट में सोशल इंजीनियरिंग पर खासा फोकस किया गया है। मोदी कैबिनेट में उत्तर प्रदेश से पांच पिछड़ी, दो दलित और तीन अन्य पिछड़ी जाति के नेताओं को मंत्री पद दिया गया है। माना जा रहा है कि यह जातिगत संतुलन साधने के साथ ही एनडीए के सहयोगी दलों का भी ख्याल रखने की कोशिश है। इसी कड़ी में नई सरकार के गठन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश समेत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय से पांच सदस्यों को शामिल किया है। उत्तर प्रदेश से पांच पिछड़ी, दो दलित और तीन अन्य पिछड़ी जाति के नेताओं को मंत्री पद दिया गया है।
पिछली बार से कम मंत्री पद
इस बार उत्तर प्रदेश में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को सिर्फ 33 सीटें ही मिलीं। जिसका नतीजा कैबिनेट में भी दिखा मोदी कैबिनेट में उत्तर प्रदेश से मंत्रियों का कोटा भी कम हो गया है। पिछली सरकार में उत्तर प्रदेश से 12 मंत्री थे। इनमें से 7 मंत्री चुनाव हार गए। 2019 में दिल्ली में मोदी सरकार बनाने में उत्तर प्रदेश ने अहम भूमिका निभाई थी। उस समय सहयोगी दलों के साथ मिलकर भाजपा ने उत्तर प्रदेश से 64 सीटें जीती थीं। इसके चलते प्रधानमंत्री समेत 14 मंत्री केंद्रीय कैबिनेट में बनाए गए थे, जबकि इस बार यह संख्या घटकर 36 रह गई है।

