Delhi Politics: दिल्ली का नया मुख्यमंत्री कौन होगा? जब से अरविंद केजरीवाल ने अपने इस्तीफे की घोषणा की है, राजधानी में हर किसी की जुबान पर यही सवाल है। केजरीवाल सरकार में कद्दावर मंत्री आतिशी के अलावा जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें सुनीता केजरीवाल (मुख्यमंत्री की पत्नी), सौरभ भारद्वाज, कैलाश गहलोत और गोपाल राय जैसे मंत्री शामिल हैं। हालांकि, पार्टी सूत्रों का कहना है कि केजरीवाल किसी ऐसे चेहरे को भी आगे ला सकते हैं, जिसके नाम की चर्चा मीडिया या पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच न हुई हो।
नए चेहरे पर विचार-विमर्श के लिए सोमवार को आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा करने के लिए केजरीवाल के सरकारी आवास पर पहुंचे। पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक भी बुलाई गई है। एक दिन पहले ही अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे की अप्रत्याशित घोषणा की थी।
माना जा रहा है कि विधानसभा की बैठक से पहले पार्टी के वरिष्ठ नेता कुछ प्रमुख नामों पर चर्चा कर किसी एक को अंतिम रूप देना चाहते हैं। शीर्ष नेतृत्व विधानसभा की बैठक में नाम पेश करेगा और विधायकों से मंजूरी मिलने के बाद नए सीएम के नाम की घोषणा की जाएगी।
राखी बिड़ला को बना सकते हैं ‘ट्रम्प कार्ड’
सूत्रों का कहना है कि आतिशी या सुनीता केजरीवाल के बजाय अरविंद केजरीवाल राखी बिड़ला को अपना उत्तराधिकारी चुन सकते हैं। तर्क यह है कि राखी बिड़ला को मुख्यमंत्री बनाकर वह एक साथ कई लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। एक तरफ वह महिला सीएम बनाकर महिलाओं को संदेश दे सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ दलित कार्ड भी खेल सकते हैं। राखी बिड़ला अन्ना आंदोलन के समय से ही आम आदमी पार्टी से जुड़ी हुई हैं।
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मंगोलपुरी विधानसभा क्षेत्र से वर्तमान में विधायक राखी बिड़ला विधानसभा में डिप्टी स्पीकर भी हैं। 2013 में जब आम आदमी पार्टी ने पहली बार सरकार बनाई थी, तब उन्हें केजरीवाल के मंत्रिमंडल में जगह दी गई थी। चार बार के कांग्रेस विधायक राज कुमार चौहान को हराने के बाद पहली बार विधायक बनीं बिड़ला को महिला एवं बाल कल्याण और समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। वह दिल्ली की सबसे कम उम्र की मंत्री थीं। 2014 में पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव में उत्तर पश्चिम सीट पर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे उदित राज के खिलाफ उतारा था। हालांकि वह चुनाव हार गईं, लेकिन उस लोकसभा चुनाव में वह देश में सबसे ज्यादा वोट पाने वाली ‘आप’ उम्मीदवार थीं।
दो बड़े दलित नेता छोड़ चुके हैं पार्टी
गौरतलब है कि हाल ही में दो बड़े दलित चेहरे पार्टी छोड़ चुके हैं। पहले मंत्री राजकुमार आनंद और बाद में पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने पार्टी पर दलितों और पिछड़े समुदायों को उचित अवसर न देने का आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया। पहले बसपा में रहे राजकुमार आनंद भाजपा में शामिल हो गए हैं, जबकि गौतम कांग्रेस में चले गए हैं। सूत्र बताते हैं कि राखी बिड़ला को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी इन दो दलित नेताओं के जाने से हुए नुकसान की भरपाई कर सकती है। वह केजरीवाल की भरोसेमंद सहयोगी रही हैं। साथ ही इससे पार्टी कार्यकर्ताओं को यह संदेश भी मिल सकता है कि पार्टी के लिए ईमानदारी और निष्ठा से काम करने वालों को सही समय पर पुरस्कृत किया जाएगा। यह भी कहा जा रहा है कि केजरीवाल अपनी पत्नी को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा को कोई नया ‘वंशवाद की राजनीति’ का मुद्दा नहीं देना चाहते।

