Delhi News: उपराज्यपाल सचिवालय ने एक बयान जारी कर सौरभ भारद्वाज की तीखी आलोचना की है। बयान में दावा किया गया है कि अपने विभागों की देखरेख करने में पूरी तरह विफल रहे मंत्री अब हर दिन एलजी पर बेबुनियाद आरोप लगाकर अपनी मंत्री पद की कुर्सी बचाने की कोशिश कर रहे हैं। एलजी सचिवालय के मुताबिक पिछले एक दशक में दिल्ली के हालात लगातार खराब होते गए हैं। दिल्ली निवासियों के लिए नर्क बनती जा रही है। नालों की उचित सफाई न होने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं और नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं। बारिश के बाद से सड़कों पर कूड़ा-कचरा भरा पड़ा है और लोगों को दूषित पानी मिल रहा है। मलेरिया और डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि, दिल्ली के लोगों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय मंत्री मीडिया में बेतुकी बयानबाजी करने में व्यस्त हैं।
एलजी ने खाली पदों पर भर्ती में रोड़ा अटकाया
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को एलजी पर सरकारी अस्पतालों में खाली पदों पर भर्ती में जानबूझकर रोड़ा अटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि जब भर्ती का मामला उठाया जाता है तो एनसीसीएसए की बैठक का बहाना बनाया जाता है। इस बीच, पीडब्ल्यूडी विभागों में बिना किसी बैठक के ग्रुप ए के सात अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई। भारद्वाज ने कहा कि हाल ही में रोहिणी के आशा किरण होम में 14 लोगों की मौत हो गई। जांच में पता चला कि डॉक्टरों, विशेषज्ञों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के कारण ऐसा हुआ। इसके बावजूद अस्पतालों में भर्ती नहीं हो रही है।
भारद्वाज ने लगाए यह आरोप
कई बार शिकायत कर चुके मंत्री ने कहा कि हर अस्पताल में एक निदेशक या एक चिकित्सा अधीक्षक होना चाहिए, लेकिन हकीकत यह है कि एक व्यक्ति को कई अस्पतालों की जिम्मेदारी दी जा रही है। स्वास्थ्य मंत्री का पदभार संभालने के बाद से उन्होंने एलजी को बार-बार बताया है कि दिल्ली के अस्पतालों में डॉक्टरों और विशेषज्ञों के करीब 30 फीसदी पद खाली हैं। एलजी का कार्यालय यह कहकर जवाब देता है कि एनसीसीएसए की बैठक नहीं हो पाई, इसलिए वे अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति नहीं कर पा रहे हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने यह भी बताया कि अन्य विभागों में एनसीसीएसए की बैठक के बिना ही नियुक्तियां की जा रही हैं, जबकि अस्पतालों के मामले में मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति का बहाना बनाकर भर्ती में बाधा डाली जा रही है।
मामला हाईकोर्ट पहुंचा
हाईकोर्ट में एक एमिकस क्यूरी ने याचिका दायर कर कहा है कि उपराज्यपाल और राज्य सरकार के बीच चल रहे विवाद के कारण डॉक्टरों, विशेषज्ञों और अन्य कर्मचारियों के 38,000 पद खाली हैं। याचिका में इस मामले में कोर्ट से हस्तक्षेप करने की मांग की गई है।

