महाराष्ट की राजनीति में बड़ा तख्तापलट हो गया चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे को असली शिवसेना मान लिया है और शुक्रवार की शाम को आयोग ने शिंदे गुट को शिवसेना का नाम देते हुए तीर-कमान का निशान भी शिंदे को सौंप दिया गया और इस निशान को इस्तेमाल करने की इजाजत भी दे दी है। आयोग ने पाया है कि शिवसेना का मौजूदा संविधान अलोकतांत्रिक है। उद्धव गुट ने बिना चुनाव कराए अपनी मंडली के लोगों को अलोकतांत्रिक रूप से पदाधिकारी नियुक्त करने के लिए इसे बिगाड़ा।
चुनाव आयोग ने यह भी पाया कि शिवसेना के मूल संविधान में अलोकतांत्रिक तरीकों को गुपचुप तरीके से वापस लाया गया, जिससे पार्टी निजी जागीर के समान हो गई। इन तरीकों को चुनाव आयोग 1999 में नामंजूर कर चुका था। पार्टी की ऐसी संरचना भरोसा जगाने में नाकाम रहती है। इसी के साथ महाराष्ट्र में शिवसेना से अब उद्धव गुट की दावेदारी खत्म मानी जा रही है।
चुनाव आयोग का फैसला लागू हुआ तो शिवसेना की सभी संपत्तियों से उद्धव ठाकरे को हाथ धोना पड़ेगा। ADR के आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 में शिवसेना के पास 148.46 करोड़ की एफडी और 186 करोड़ की अचल संपत्ति है। अब शिंदे गुट असली शिवसेना के रूप में जिसे कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपेगा, उसके हस्ताक्षर को पार्टी की तरफ से वित्तीय लेन-देन के लिए मान्यता मिलेगी। महाराष्ट्र में 82 जगहों पर शिवसेना के दफ्तर हैं।
सूत्रों का कहना है कि बाला साहब ने अपनी वसीयत में मुंबई में स्थित मातोश्री के तीन मंजिला भवन की पहली मंजिल जयदेव के नाम और दूसरी तथा तीसरी मंजिल उद्धव के नाम कर दी जबकि ग्राउंड फ्लोर को शिवसेना के लिए रखा था। अब उद्धव ठाकरे के पास से मातोश्री इमारत के ग्राउंड फ्लोर का मालिकाना हक चला जाएगा।
उद्धव ठाकरे ने सरकार पर बोला धाबा कहा- सरकार कर रही दादागिरी
उद्धव ठाकरे ने फैसले पर नाराजगी जताते हुए कहा- देश में लोकतंत्र खत्म हो गया है। पार्टी किसकी है, ये चुने हुए प्रतिनिधि ही तय करेंगे तो संगठन का क्या मतलब रह जाएगा। चुनाव आयोग का फैसला लोकतंत्र के लिए घातक है। हमारी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। देश में सरकार की दादागीरी चल रही है। हिम्मत है तो चुनाव मैदान में आइये, चुनाव लड़िए। वहां जनता बताएगी कि कौन असली है और कौन नकली।
शिंदे ने उद्धव की बात पर दिया करारा जवाब
उद्धव ठाकरे ने अपने गुट को कथित तौर पर ‘चोर’ कहा तो इस पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, ’50 विधायक, 13 सांसद, सैकड़ों जनप्रतिनिधि और लाखों कार्यकर्ता चोर हैं। आप क्या हैं? आत्मनिरीक्षण करें कि यह दिन क्यों आया? आपने 2019 में बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को बेच दिया।’
शिंदे ने कहा- उन्होंने (उद्धव ठाकरे गुट ने) 2019 में ‘तीर-कमान’ को गिरवी रख दिया था। हमने बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और ‘तीर-कमान’ को भुनाया। मैं इस पवित्र काम के लिए चुनाव आयोग को धन्यवाद देता हूं। मोदी जी का नाम देश में ही नहीं दुनियाभर में है। हाल के एक ग्लोबल सर्वे में वे नंबर-1 (राजनेता) हैं। आपको जलन क्यों हो रही है? सच को स्वीकार करें। ऐसे शब्दों से पीएम मोदी की लोकप्रियता कम नहीं होगी। शब्दों की आपसी जंग शुरू हो चुकी है। शब्दों के वार पलटवार महाभारत के युद्द की तरह छिड़ चुके हैं।
फडणवीस भी इस मामले में कूदे
महाराष्ट्र उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा- CM एकनाथ शिंदे की शिवसेना को शिवसेना का चिन्ह और नाम मिला है। असली शिवसेना एकनाथ शिंदे की शिवसेना बनी है। हम पहले दिन से आश्वस्त थे, क्योंकि चुनाव आयोग के अलग पार्टियों के बारे में इसके पहले के निर्णय देखे तो इसी प्रकार का निर्णय आए हैं।
संजय राउत ने भी तीखे शब्दों का वार करते हुए चुनाव आयोग और सरकार को घेरा
चुनाव आयोग के फैसले पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने ट्वीट किया- इसकी स्क्रिप्ट पहले से तैयार थी। देश तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। कहा गया था कि नतीजा हमारे पक्ष में होगा, लेकिन अब एक चमत्कार हो गया है। लड़ते रहो। ऊपर से नीचे तक करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाया है। हमें फिक्र करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जनता हमारे साथ है। हम जनता के दरबार में नया चिह्न लेकर जाएंगे और फिर से शिवसेना खड़ी करके दिखाएंगे, ये लोकतंत्र की हत्या है।

