साल 2024 से पहले भाजपा ने एक ऐसा ब्रह्मास्त्र चला है कि सियासत में घमासान मचा हुआ है। पटना में एकजुट हुए विपक्ष की ज़्यादातर पार्टियों ने इसका विरोध किया लेकिन आम आदमी पार्टी और बसपा यूसीसी पर अलग लाइन लेती हुई दिख रही है। ‘आप’ और बसपा ने कहा कि वो ‘सैद्धांतिक रूप से’ समान नागरिक संहिता का समर्थन करती है, लेकिन साथ ही कहा कि इसे सभी दलों के समर्थन से लागू होना चाहिए। आम आदमी पार्टी के नेता संदीप पाठक ने भी कहा है कि उनकी पार्टी सैद्धांतिक रूप से यूसीसी का समर्थन करती है, आर्टिकल 44 भी इसका समर्थन करता है। आर्टिकल 44 कहता है कि UCC होना चाहिए, लेकिन ये मुद्दा सभी धर्म संप्रदाय से जुड़ा मुद्दा है, पर स्टेक होल्डर्स से आम सहमति बनानी चाहिए।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा “हमारी पार्टी यूसीसी के विरोध नहीं है, मायावती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा कि यूसीसी लागू होने से देश मजबूत होगा और भारतीय एकजुट होंगे. इससे लोगों में भाईचारे की भावना भी विकसित होगी साथ में मायावती ने ये भी कह दिया कि यूसीसी को जबरदस्ती लागू करना ठीक नहीं है, इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने से दिक्कतें पैदा होंगी। सरकार को फिलहाल महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए।
बसपा चीफ मायावती ने आगे यूसीसी को लेकर कहा कि हमारी पार्टी यूसीसी को लागू करने के खिलाफ नहीं है, लेकिन जिस तरह से बीजेपी देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की कोशिश कर रही है, हम उसका सपोर्ट नहीं करते हैं। इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना और जबरदस्ती यूसीसी को देश में लागू करना ठीक नहीं है। आपको बता दें की मायावती ने BJP के इस तरीके पर सवाल भी उठाये
बहुजन समाज पार्टी की चीफ ने आगे कहा कि संविधान की धारा 44 में UCC बनाने के प्रयास का तो जिक्र है मगर इसे थोपने का नहीं है। वहीं यूनिफॉर्म सिविल कोड का विरोध करने वालों में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का नाम सबसे ऊपर आता है. एआईएमपीएलबी के महासचिव मुहम्मद फजल उर रहीम मुजद्दिदी का कहना है कि देश में मुस्लिम लॉ की सुरक्षा करना उसका मुख्य उद्देश्य है। साथ ही ऐसे हर कानून को रोकना उसका काम है, जो मुस्लिम पर्सनल को प्रभावित कर रहा हो।

