Agra: पूरे उत्तर भारत में इस समय विकराल गर्मी अपनी तपन से सबको परेशान कर रही है. बच्चे-बुजुर्ग सभी घरों में कैद रहने को मजबूर हैं. इतनी भयानक गर्मी के बाद भी आगरा में प्रशासन सुस्त है. सरकारी अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें लगी हैं. मरीज बेहाल हैं, तीमारदार भी गर्मी से राहत पाने के लिए तमाम उपाय कर रहे हैं. लेकिन अस्पतालों में अव्यवस्थाएं जस की तस हैं. आगरा के छावनी विभाग में अधिकारी मस्त हैं, जबकि जनता त्रस्त है.
आगरा छावनी अस्पतालों में 14 लगभग करोड़ खर्च करके भी सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नजर नहीं आता है. कहीं भी न तो बेहतर मशीने नजर आती हैं न ही मरीजों के तीमारदारों के लिए सुविधाएँ दिखाई देती हैं. 47 डिग्री के तापमान में भी मरीज अपने घरों से पंखें लाकर खुद पर हवा करने को मजबूर हैं. प्रशासन ने मरीजों को ठेंगा दिखा दिया है. छावनी अस्पताल के भीतर करोड़ों रूपए खर्चा होने के बाद भी हालातों में कोई सुधार नहीं हैं. मरीजों की शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है.
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मरीजों की शिकायत है कि अधिकारी खुद तो AC में बैठे रहते हैं, जबकि मरीज बाहर भयंकर गर्मी में लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं. इसके आलावा ये भी शिकायत है कि प्राइवेट अस्पतालों की एम्बुलेंस लगाकर यहां मरीजों को इलाज के लिए लाया जाता है. जिसका मरीजों से पैसा लिया जाता है, इसके अलावा मोटे कमिशन के लिए बाहर की प्राइवेट दवाओं को डॉक्टर लिख देते हैं. इससे गरीबों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है.

