आगरा/ हथिनीकुंड से छोड़े गए पानी के बाद यमुना नदी में धीरे-धीरे जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। बाढ़ की संभावना एवं तैयारियां और व्यवस्थाओं को लेकर जिलाधिकारी आगरा ने अधीनस्थों के साथ यमुना व चंबल नदी घाट सहित यमुना नदी किनारे गांव पहुंचकर निरीक्षण किया और अधीनस्थों को तैयारियों को लेकर जरूरी दिशा निर्देश दिए हैं ताकि बाढ़ आने पर जनमानस को कोई भी परेशानी ना हो सके।
आपको बता दें मध्य प्रदेश राजस्थान ,उत्तर प्रदेश में हो रही लगातार बारिश के चलते चंबल नदी का 2 दिन में लगातार 4 मीटर तक पानी बढ़ गया है। जिससे यमुना नदी व चंबल किनारे बीहड़ में बसे गांव के लोगों की धड़कनें जरूर बढ़ने लगी हैं। फिलहाल खतरे की कोई आशंका नहीं है। फिर भी लोगों ने बीहड़ के नदी किनारे बसे गांव के लोगों ने सामान एकत्रित करना शुरू कर दिया है। साथ ही संभावित ठिकानों पर अपने ठिकाने के लिए जगह तलाशना शुरू कर दिया है।
चंबल नदी में पिछले वर्ष आई भीषण बाढ़ के चलते नदी किनारे बसे गांव में भारी नुकसान हुआ था। पिनाहट घाट पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर 137.60 मीटर तक पहुंच गया था। चंबल नदी ने किनारों के गांव में भारी तबाही मचाई थी किसानों की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी। दर्जनों गांव में पानी घुसने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
एक बार फिर लगातार हो रही बारिश और चंबल नदी में बाढ़ की संभावना एवं तैयारियां व्यवस्थाओं को लेकर एडीएम फाइनेंस आगरा यशवर्धन सिंह ने मंगलवार को पिनाहट चंबल नदी घाट पर अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ निरीक्षण किया और जानकारी ली चंबल नहर पंप हाउस पर उन्होंने चंबल में बाढ़ की संभावना और व्यवस्थाओं को लेकर अधीनस्थों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। चंबल नदी किनारे बसे गांव क्योरी, उमरेठापुरा, बीच का पुरा, पहुंचकर ग्रामीणों से जानकारी ली और बाढ़ की संभावना को लेकर क्या व्यवस्थाएं हैं देखी गई। साथ ही अधीनस्थों को गांव में बाढ़ चौकियां स्थापित किए जाने के लिए आदेश दिए। साथ ही ग्रामीणों को कोई भी दिक्कत ना हो जिसके लिए तत्काल प्रशासन अधिकारियों को अवगत कराने के लिए कहा गया।
यमुना नदी और चंबल नदी के जल स्तर पर निगाह बनाए रखने एवं बाढ़ प्रभावित संभावित गांव में बाढ़ चौकियां स्थापित करने के लिए लेखपालों को निर्देशित किया गया। ताकि पिछले वर्ष की तरह लोगों को कोई परेशानी ना हो सके। एडीएम द्वारा एसडीएम को मॉनिटरिंग करने एवं अधीनस्थों के साथ बैठकर बाढ़ आने पर निपटने के लिए रणनीति बनाए जाने के लिए कहा गया है।

