Aaj Ka Panchang: 28 जून 2024 को हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ महीने में कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और सौभाग्य योग के कारण इस दिन को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। जो लोग महत्वपूर्ण कार्य करना चाहते हैं, उनके लिए शुक्रवार को सुबह 11:56 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक शुभ अभिजीत मुहूर्त है। राहु काल से बचने की सलाह दी जाती है, जो सुबह 10:40 बजे से दोपहर 12:23 बजे के बीच पड़ता है, क्योंकि इस अवधि को पारंपरिक रूप से अशुभ माना जाता है। इस दिन के महत्व को और बढ़ाते हुए, चंद्रमा मीन राशि में स्थित होगा।
तिथि और तिथि
28 जून, 2024 को हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ महीने में कृष्ण पक्ष का सातवां दिन (सप्तमी) है। सप्तमी तिथि शाम 4:28 बजे तक रहेगी।
नक्षत्र और योग
इस दिन सुबह 10:02 बजे तक पूर्वाभाद्र नक्षत्र रहेगा। इसके अलावा, शुभ सौभाग्य योग भी रहेगा, जो रात 9:37 बजे तक रहेगा।
करण
दिन की शुरुआत सुबह 5:33 बजे तक विष्टि करण से होगी, उसके बाद बव करण होगा, जो शाम 4:28 बजे तक रहेगा।
ग्रहों की स्थिति और अन्य समय
- सूर्योदय: 5:29 AM
- सूर्यास्त: 7:18 PM
- चंद्रमा: चंद्रमा मीन राशि (मीन राशि) में स्थित होगा।
- राहु काल: 10:40 AM से 12:23 PM
- शुभ अभिजीत मुहूर्त: 11:56 AM से 12:51 PM
विक्रमी संवत और शक संवत
- विक्रमी संवत: 2081
- शक संवत: 1944
पंचांग को समझना
हिंदू पंचांग, जिसे वैदिक कैलेंडर के रूप में भी जाना जाता है, एक पारंपरिक प्रणाली है जिसका उपयोग सटीक समय-निर्धारण और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के लिए किया जाता है। इसमें पाँच मुख्य तत्व शामिल हैं: तिथि, नक्षत्र, वार, योग, और करण।
विस्तृत विवरण:
तिथि: चंद्रमा द्वारा सूर्य से 12 डिग्री दूर जाने में लिया गया समय तिथि कहलाता है। प्रत्येक महीने में तीस तिथियाँ होती हैं, जिन्हें दो चरणों में विभाजित किया जाता है: पूर्णिमा के साथ समाप्त होने वाला बढ़ता हुआ चरण (शुक्ल पक्ष), और अमावस्या के साथ समाप्त होने वाला घटता हुआ चरण (कृष्ण पक्ष)।
नक्षत्र: आकाश में तारों के समूह को नक्षत्र कहा जाता है। 27 नक्षत्र हैं, जिनमें से प्रत्येक एक विशिष्ट ग्रह से जुड़ा हुआ है। इन नक्षत्रों के नामों में अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी और अन्य शामिल हैं।
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वर: हिंदू ज्योतिष में सप्ताह के दिनों का नाम सात खगोलीय पिंडों के नाम पर रखा गया है: सोमवार, मंगलवार , बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार।
योग: योग सूर्य और चंद्रमा के बीच की दूरियों का एक विशिष्ट संयोजन है, जिसके परिणामस्वरूप 27 अलग-अलग योग बनते हैं जैसे कि विष्कुंभ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य और अन्य।
करण: प्रत्येक तिथि को दो करण में विभाजित किया गया है। कुल ग्यारह करण हैं, जिनमें बव, बलव, कौलव, तैतिल, गरिजा, वणिज, विष्टि, शकुनि, चतुष्पद, नागव और किंस्तुघ्न शामिल हैं। विष्टि करण, जिसे भद्रा के नाम से भी जाना जाता है, नए उद्यम शुरू करने के लिए अशुभ माना जाता है।

