बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) का आज 15 जनवरी को 68वां जन्मदिन है बहन कुमारी मायावती ने पीसी कर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा धर्म की आड़ में राजनीति हो रही है, राशन फ्री देकर देश को गुलाम बनाया जा रहा है, हमने यूपी में अपनी 4 बार की सरकार बनाई और हर वर्ग के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू की थी लेकिन सरकारें नाम और स्वरूप बदल कर इन योजनाओं को अपना बता रही हैं लेकिन जातिवादी होने के कार ये हो नहीं पा रहा। इस दौरान मायावती ने ये भी साफ कर दिया कि 2024 का लोकसभा चुनाव वो अकेले लड़ेंगी।
BSP सुप्रीमो मायावती ने 24 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने का किया ऐलान
बसपा चीफ मायावती (Mayawati) ने गठबंधन का जिक्र करते हुए कहा कि गठबंधन कने से पार्टी को फायदा कम नुकसान ज्यादा होता है क्योंकि वोट प्रतिशत घट जाता है इसलिए बसपा अकेले चुनाव लड़ेगी और बेहतर नतीजे लाएगी। चुनाव अकेले लड़ने की मायावती ने वजह भी बताई उन्होंने कहा कि बसपा अकेले चुनाव इसलिए अकेले लड़ती है क्योंकि इसका सर्वोच्च नेतृत्व एक दलित के हाथ है और गठबंधन में चुनाव लड़कर बसपा का ये पूरा वोट गठबंधन को चला जाता है और उनका विशेषक अपर कास्ट वोट बसपा को नहीं मिल पाता। बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने अयोध्या राम मंदिर में रामलला प्राण प्रतिष्ठा न्योते को लेकर पीसी में कहा- मुझे निमंत्रण मिला है लेकिन पार्टी के काम की व्यस्तता के चलते मैनें ना जाने का फैसला लिया है लेकिन जो भी कार्यक्रम हो रहा है मैं इससे ऐतराज नहीं कर रही हूं और स्वागत कर रही हूं अगर आगे चलकर बाबरी मस्जिद को लेकर कुछ होगा तो उसका भी स्वागत करूंगी।
अब बात करते हैं बसपा चीफ मायावती के राजनीतिक सफर की…
मायावती (Mayawati) दमदार व्यक्तित्व की राजनीतिज्ञ महिला हैं जिन्होनें राज्य के मुखिया के दायित्वों को बखूबी निभाया और एक राजनीति दल का नेतृत्व करती आ रही हैं यूपी में जब भी जातिवाद राजनीति का नाम आता है तब मायावती का नाम जरूर याद आता है लेकिन क्या आप जानते हैं मायावती राजनीति में आने से पहले वो आईएएस बनना चाहती थीं शिक्षा पूरी करने के बाद मायावती प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी शुरू की इस बीच वह दिल्ली के एक स्कूल में अध्यापिका के तौर पर पढ़ाने लगीं लेकिन वो कहते हैं ना जिंदगी में व्यक्ति जो चाहता है वो उसे मिल जाए ये जरूरी नहीं मिलता वही है जो ऊपर वाले ने आपके लिए पहले से लिखकर रखा हुआ है ठी ऐसा ही मायावती के साथ रहा।
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मायावती (Mayawati) शुरू से ही बाबा डॉ भीमराव अंबेडकर से प्रभावित थीं और बाद में वो कांशीराम के संपर्क में आईं और वर्ष 1977 में कांशीराम मायावती के घर गए जहां दोनों की मुलाकत हुई और कांशीराम मायावती के विचारों से प्रभावित हो गए और उन्होंने वर्ष 1984 में बहुजन समाजवादी पार्टी की स्थापना कर मायावती को पार्टी में शामिल कर लिया। मायावती बेहद ही साधारण परिवार से थीं और उनके पिता नहीं चाहते थे कि वो राजनीति में आए लेकिन जैसे ही मायावती ने राजनीति में एंट्री की तो पिता ने बेटी से रिश्ता तोड़ लिया लेकिन मायावती ने अपनी राह चुन ली थी और दलितों की आवाज़ बनकर वह यूपी का राजनीति में शामिल हो गईं और चार बार प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी।

