नई दिल्ली। (2020 Delhi riots ) पेशे से वकील और कांग्रेस नेता इशरत जहां के जमानत के शर्तों में बदलाव किया गया हैं। जिसके बाद अब नई शर्तों के साथ पूरे देश में भ्रमण कर सकते हैं। इशरत जहां ने यह कहते हुए अदालत का रुख किया था कि अदालत की अनुमति के बिना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के बाहर यात्रा करने से रोकने वाली जमानत की शर्त उनके पेशे को प्रभावित कर रही है। जिसके बाद कोर्ट ने उनके शर्तों को मानते हुए उनकी जमानत में छूट दे दी हैं।
2020 Delhi riots मामले में इस शर्त से मिली निजात
दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां की जमानत शर्तों को संशोधित करते हुए उन्हें अदालत की पूर्व अनुमति के बिना पूरे भारत में यात्रा करने की अनुमति दे दी। पूर्व कांग्रेस पार्षद पेशे से वकील हैं, जिन्हें 2022 में दिल्ली दंगों के गैरकानूनी गतिविधियां में शामिल होने के मामले में सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद दो साल की जेल काटने के बाद जहां जमानत पाने वाले पहले व्यक्ति थी। ट्रायल कोर्ट ने जहान को इस शर्त के साथ जमानत दी कि उसे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) दिल्ली नहीं छोड़ना होगा। जिसमें कोर्ट ने सुधार करते हुए इस शर्त को दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में संशोधित किया गया।
2020 Delhi riots मामले में कोर्ट में क्या क्या हुआ ?
इस जमानत शर्त से असंतुष्ट, जहां का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील आदिल सिंह बोपाराय ने एक आवेदन दायर किया जिसमें कहा गया कि अदालत की अनुमति के बिना एनसीआर के बाहर यात्रा करने से रोकने वाली जमानत की शर्त भारत में अन्य अदालतों के समक्ष अभ्यास करने के लिए उनकी पेशेवर गतिविधियों को प्रभावित कर रही थी। उनके अनुरोध को स्वीकार करते हुए, अदालत ने जमानत की शर्त को इस हद तक संशोधित किया कि वह अदालत की पूर्व अनुमति के बिना न तो भारत का क्षेत्र छोड़ेंगी और न ही किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि में शामिल होंगी।
कई मामलों में जमानत पर हैं पूर्व कांग्रेस पार्षद
पूर्व कांग्रेस पार्षद के आवेदन का अभियोजन पक्ष ने विरोध किया, जिसमें कहा गया कि अदालत ने पहले ही आरोपी को उचित स्वतंत्रता दे दी है और उसे कोई और राहत नहीं दी जानी चाहिए। यह देखते हुए कि वह न तो दंगों के लिए पूर्वोत्तर दिल्ली में शारीरिक रूप से मौजूद थी और न ही किसी का हिस्सा थी। दिल्ली की एक अदालत ने मार्च 2022 में 2020 के दंगों से संबंधित यूएपीए मामले में जहां को जमानत दे दी थी। उन्हें पहले भी एक अन्य मामले में जमानत दी गई थी जिसमें उन पर पूर्वोत्तर दिल्ली के खुरेजी खास में नागरिकता संशोधन अधिनियम विरोधी प्रदर्शन स्थल पर भीड़ को उकसाने का आरोप था।

