President of Bharat News : संसद के विशेष सत्र के आह्वन के बाद से ही देश भर में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे, विशेष सत्र का मामला थमा भी नहीं था कि तब तक देश के नाम बदलने की ख़बर सुर्ख़ियां बनाने लगी। आख़िर देश में अचानक उठे इस भूचाल के क्या मायने हैं, इसको विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।
क्यों मज़बूत स्थिति में है इंडिया?
भारत में लगभग पिछले एक दशक से मज़बूत विपक्ष की कमी है, लोक सभा में हालात ये हैं कि किसी पार्टी के पास इतनी भी सीटें नहीं है कि नेता प्रतिपक्ष चुना जा सके। देश में अगले ही साल यानी की 2024 में आम चुनाव होने हैं, इसी सिलसिले देश की लगभग 26 राजनैतिक पार्टियां एक साथ आई है और 26 पार्टियों ने अपने गठबंधन का नाम जब इंडिया रखा तो ये चर्चा का विषय बन गया। जहां कांग्रेस ने कर्नाटक और हिमाचल में भाजपी सूपड़ा साफ कर दिया तो वहीं कई राज्यों में INDIA की पार्टियां एक मज़बूत स्थिति में हैं, फिर बात चाहे पश्चिम बंगाल में टीएमसी की हो या दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की हो।
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विपक्ष ने क्यों खेला इंडिया दांव ?
विपक्ष जहां एक ओर एकजुट हो रहा है, दूसरी ओर भाजपा की दो राज्यों में हार ने पार्टी को सोचने पर मजबूर कर दिया क्या विपक्ष धीरे-धीरे ही सही पर ताकतवर हो रहा है। बात जब नए गठबंधन के नामकरण की आई तो सभी पार्टियों ने सहमति से नाम रखा इंडिया। अब ये एक मज़बूत दांव है, जहां नाम ना केवल देश के नाम पर है बल्कि इंडिया नाम देश को एकजुट करने के लिए भी कारगर साबति हो सकता है, इसीलिए विपक्ष ने इंडिया दांव खेला।
क्या भाजपा ‘भारत’ से कर पाएगी ‘INDIA’ के वोट में सेंधमारी ?
जी-20 के बाद संसद के विशेष सत्र के बुलावे और President of India की जगह President of Bharat की खब़र ने देश के नाम बदलने के कयासों को और तेजी दे दी है। अब विपक्ष ने आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि देश का नाम केवल इसलिए बदला जा रहा क्योंकि गठबंधन का नाम इंडिया रखा गया, लेकिन सवाल बड़ा सवाल ये है कि क्या बीजेपी इससे इंडिया के वोट बैंक में सेंध लगाने में कामयाब हो पाएगी।
गुलामी की निशानी मिटाने की तरफ़ एक और कदम ?
पिछले कुछ समय से हमनें देखा है कि सरकार का ध्यान गुलामी की निशानी के प्रतीकों को मिटाने की तरफ रहा है। सरकार इस कदम को भी इसी से जुड़ा बता सकती है और ये कह सकती है कि इसका विपक्ष से या इंडिया गठबंधन से कोई भी लेना-देना नहीं है। बहरहाल ये मुद्दा राजनैतिक गलियारों में कुछ समय तक घूमने वाला है और कब तक इसका जवाब तो समय ही देगा।
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